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छात्रों को एक साथ दो डिग्रियों के अवसर!!

छात्रों को एक साथ दो डिग्रियों के अवसर!! एक छात्र एक ही समय में दो स्नातक, स्नातकोत्तर या डिप्लोमा पाठ्यक्रम …


छात्रों को एक साथ दो डिग्रियों के अवसर!!

किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
एक छात्र एक ही समय में दो स्नातक, स्नातकोत्तर या डिप्लोमा पाठ्यक्रम कर सकते हैं!!

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा क्षेत्र को स्वर्णम बनाने की अनेक योजनाएं – नए भारत के निर्माण में शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका – एड किशन भावनानी

गोंदिया – मानवीय जीवन में समय के चक्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है,क्योंकि स्थितियों परिस्थितियों के अनुसार समय का चक्र बदलते रहता है और मानवीय जीवन को समय-चक्र के पीछे चलकर अपनी जीवनशैली, स्थितियों परिस्थितियों के अनुसार ढलने के लिए मजबूर होना पड़ता है जो वर्तमान पिछले दो वर्षों से हम देख रहे हैं कि समय के चक्र नें कोरोना महामारी के भयंकर प्रकोप की स्थितियों परिस्थितियों के रास्ते से हमें लाकर और फ़िर आगे बढ़ाकर फिर उसमें से उबर कर लाया है जिसका शिक्षा स्वास्थ्य और वित्तीय क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों ने भारी नुकसान उठाया गया है।
आज हम सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक शिक्षा क्षेत्र पर अति महत्वपूर्ण विस्तृत व सुधारात्मक उपायों की सुविधाओं की चर्चा करेंगे क्योंकि कोविड-19 के कारण हुई शिक्षा क्षेत्र की क्षति को छात्रों को एक साथ दो डिग्रियों के अवसर प्रदान कर गैप को भरने की महत्वपूर्ण कोशिश की जा रही है अब अधिसूचना जारी होने के बाद एक छात्र एक ही समय में दो स्नातक,स्नातकोत्तर या डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक साथ कर सकते हैं जिसमें कुछ शर्तों बंधनों को जोड़ा गया है।
हालांकि इस व्यवस्था के कुछ विपरीत परिणाम भी हो सकते हैं क्योंकि छात्रों के पास डिग्रियों का जमावड़ा होगा और उससे बेरोजगारी संघर्ष के बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
साथियों बात अगर हम एक साथ दो डिग्रियों के अवसर की करें तो, क्या पहले किसी ने सोचा था कि कोई छात्र डिप्लोमा, ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन किसी में भी एक साथ दाखिला ले सकता है ? भारतीय छात्रों के पास अब यह स्वतंत्रता है कि वह एक ही समय में डिप्लोमा और ग्रेजुएशन अथवा ग्रेजुएशन एवं पोस्ट ग्रेजुएशन या फिर दो ग्रेजुएशन पाठ्यक्रमों में एक साथ दाखिला ले सकते हैं. उच्च शिक्षा में यह नए बदलाव यूजीसी द्वारा किए गए हैं। इस नए बदलाव के बाद अब विश्वविद्यालयों को अपने अटेंडेंस सिस्टम में भी व्यापक बदलाव करना होगा। एक साथ दो डिग्री ले रहे छात्रों कि अटेंडेंस कैसे व्यवस्थित की जाए इसके लिए नए नियम स्वयं विश्वविद्यालय बनाएंगे। विश्वविद्यालय को न केवल अटेंडेंस सिस्टम बनाना होगा,बल्कि परीक्षा एवं प्रैक्टिकल जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए भी नया कैलेंडर तैयार करना विश्वविद्यालयों का अधिकार क्षेत्र रहेगा।
छात्र चाहे तो दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों अथवा कॉलेजों से एक साथ एक समय में दो डिग्री हासिल कर सकते हैं. इसके साथ ही एक ही समय में दोनों डिग्रियां एक ही यूनिवर्सिटी से ली जा सकती है। छात्रों को एक ही समय में दो फुल टाइम डिग्री प्राप्त करने की है यह स्वतंत्रता राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्रदान की जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपलब्ध जानकारी के अनुसार डुअल डिग्री को लेकर एक गाइडलाइन है। छात्रों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि दो डिग्री एक साथ पूरा करने पर दोनों पाठ्यक्रमों के समय में कोई टकराव न हो अलग अलग पाठ्यक्रमों की कक्षा के समय में टकराव से बचने के लिए छात्रों को कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा। दोहरी डिग्री के लिए आवेदन कर रहे छात्र चाहे तो एक डिग्री फिजिकल मोड में और दूसरी ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग अथवा ऑनलाइन मोड में कर सकते हैं। यूजीसी के मुताबिक छात्रों के पास इसके अलावा भी विकल्प उपलब्ध हैं. छात्र चाहे तो दोनों डिग्री एक साथ एक समय में ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग से कर सकते हैं. इसी तरह छात्र ऑनलाइन पाठ्यक्रम में भी दो डिग्री एक साथ एक ही समय में कर सकते हैं।
एक बार अधिसूचित होने के बाद, छात्र एक ही समय में दो स्नातक, स्नातकोत्तर डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम कर सकते हैं, जब तक कि कक्षाएं आपस में न टकराएं या यदि एक या दोनों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा हो। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार था, जिसने विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, मानविकी और खेल सहित सभी क्षेत्रों में बहु-विषयक शिक्षा का समर्थन किया। एनईपी 2020 छात्रों को अपनी शिक्षा को निजीकृत और अनुकूलित करने के लिए जितना संभव हो उतना लचीलापन प्रदान करने की सिफारिश करता है ताकि वे सभी विषयों में बहु विषयक और समग्र शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसलिए, यदि छात्र एक साथ दो डिग्री करना चाहते हैं, तो उनके पास अब एक विकल्प होगा। यह सब छात्रों की पसंद पर निर्भर करता है, कुमार ने कहा।
ड्राफ्ट गाइडलाइंस के मुताबिक छात्र तीन तरह से दो फुल टाइम डिग्री हासिल कर सकते हैं। सबसे पहले, वे दोनों अकादमिक कार्यक्रमों को व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ा सकते हैं बशर्ते कि कक्षा का समय ओवरलैप न हो। दूसरा, वे एक कार्यक्रम को व्यक्तिगत रूप से और दूसरा ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा में कर सकते हैं। और तीसरा, वे ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा के रूप में अधिकतम दो कार्यक्रम कर सकते हैं।
दो विश्वविद्यालय या कॉलेज एक दूसरे के निकट होने चाहिए। अलग-अलग शहरों में स्थित दो विश्वविद्यालयों से व्यक्तिगत रूप से दो कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना संभव नहीं है, अधिकारी ने कुछ शर्तों को स्पष्ट करते हुए कहा, जिसमें इसकी अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्र उसी कॉलेज या विश्वविद्यालय से दूसरा कार्यक्रम कर सकते हैं।यूजीसी ने यह भी आगाह किया कि इस प्रावधान के तहत आयोग या भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों से ही ऑनलाइन कार्यक्रमों की अनुमति होगी।
साथियों बात अगर हम माननीय पीएम के दिनांक 7 मई 2022 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन में प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्हें बताया गया किविश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्रों को एक साथ दो शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को पूरा करने की अनुमति दी गई है। उच्च शिक्षा में बहुविषयकता प्रधानमंत्री को यह भी बताया गया कि लचीलेपन और आजीवन शिक्षण के लिए मल्टीपल एंट्री-एग्जिट के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट लॉन्च करने से अब छात्रों को उनकी सुविधा और पसंद के अनुसार अध्ययन करना संभव हो जाएगा।
स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों दोनों द्वारा ऑनलाइन, ओपन और मल्टी-मोडल शिक्षण को अत्यधिक बढ़ावा दिया गया है। इस पहल ने कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षण की भरपाई को कम करने में मदद की है और देश के दूरस्थ और दुर्गम हिस्सों तक शिक्षा के विस्तार में बहुत योगदान देगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि छात्रों को एक साथ दो डिग्रियों का अवसर!!एक छात्र एक ही समय में दो स्नातक स्नातकोत्तर या डिप्लोमा पाठ्यक्रम कर सकते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा क्षेत्र को स्वर्णिम बनाने की अनेक योजनाएं हैं। नए भारत के निर्माण में शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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