चुपचाप देखते रहते हो| chupchap dekhte rahte ho.
चुपचाप देखते रहते हो जाने कैसा दौर गुज़र रहा है ये , खुदा का घर दहशत में है जन्नत लिपटी …
Related Posts
किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 25, 2022
किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के
नेताजी – डॉ. इन्दु कुमारी
January 25, 2022
नेताजी सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गएभारत माँ के भाल, सजा के गएस्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गएलाल थे
सबसे ख़तरनाक जहर- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 25, 2022
सबसे ख़तरनाक जहर वो बहुत अच्छे से जानते हैंकि जहर की कितनी मात्रा रोज देने सेमर जाती हैं एक इंसान
ऐ चाँद- डॉ. इन्दु कुमारी
January 25, 2022
ऐ चाँद लिख रही तेरी दास्तानशीतलता करते प्रदानदागदार वह कहलाते हैंजीवों के हित आते हैंचाँदनी फिर छिटकाते हैंनिशब्द भरी रातों
भारत माता – डॉ. इन्दु कुमारी
January 25, 2022
भारत माता भारत जननी तू हो महानतूने जने हो वीर संतानसिर हिमालय की पायीचरणों को धोता सागर हैशेरों की है
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी
January 25, 2022
कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल
.jpg)