Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

चुपचाप देखते रहते हो| chupchap dekhte rahte ho.

चुपचाप देखते रहते हो जाने कैसा दौर गुज़र रहा है ये , खुदा का घर दहशत में है जन्नत लिपटी …


चुपचाप देखते रहते हो

जाने कैसा दौर गुज़र रहा है ये ,
खुदा का घर दहशत में है
जन्नत लिपटी पड़ी  है नुकीले तारों में
खूब चलता है ब्योपार इन दिनों नुकीली तारों का |
बर्फ की चादर अब तो मैली हो चली है
खून के धब्बों से ,
जख्मी हो गए हैं
बन्दूक की नोक पर कदम रखती
ज़िन्दगी के तलवे भी ,
चल नहीं सकती रेंगा करती है अब |
सिर्फ झीलें ही नहीं जमती
स्याह मौसम ने आँखों के सागर भी जमा दिए हैं
दर्द बरसते हैं , आंसू नहीं |
अज़ानों की जगह अब
गोलियों की चीखों ने ले ली है ,
सर झुकाते ही इबादत में
पैरों के नीचे से ज़मीन खींच लेते हैं |
चुपचाप देखते रहते हो…
अपने बनाए स्वर्ग को
तब्दील होते नर्क में ,
या खुदा ! क्या तेरा दिल भी पत्थर का हो गया है ?

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13


Related Posts

होली की फुहार- अनिता शर्मा झाँसी

March 25, 2022

होली की फुहार होली आई रे आई दिलों में छाई।गाओ रे गाओ खुशी के गीत गाओ।रंगों संग फुहार बरसे प्रियतम

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

Leave a Comment