Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Priyanka_saurabh

चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव

चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव चुनाव में कुछ लोगों द्वारा इसे आपसी साख का प्रश्न बना …


चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव

चुनाव में कुछ लोगों द्वारा इसे आपसी साख का प्रश्न बना लिया जाता है जो धीरे-धीरे जहर का रूप ले लेता है। बढ़ती प्रतिद्धंद्विता रिश्तों का क़त्ल करने लगती है। अगर कोई ऐसे समय साथ न दे तो मित्र भी दुश्मन लगने लग जाते है। मगर यह हमारी भूल है। कोई भी चुनाव आखरी नहीं होता है। और रिश्तों से बढ़कर तो कतई नहीं। हम पद पाने की होड़ में ये भूल जाते है कि हमसे पहले भी चुनाव हुए है और आगे भी होंगे। इसलिए कुछ वोटों के लिए परिवार के लोगों, मित्रों, सगे-सम्बन्धियों, पड़ोसियों और अन्य से दुश्मनी के भाव से पेश आना सही नहीं है। क्योंकि चुनाव की रात ढलते ही हमें अपने आगे के दिन इन्ही लोगों के साथ व्यतीत करने है।

-प्रियंका सौरभ

‘एकता’ और ‘भाईचारा’ किसी प्रगतिशील समाज की मूलभूत ज़रूरत है। लेकिन सामाज विभिन्न जातियों और समुदायों में बंटा हुआ है, कई बार ये वजहें कड़ुवाहट पैदा करती हैं। ऐसी स्थितियों में ही सजग रहने की ज़रूरत होती है। शायरों ने ‘एकता’ और ‘भाईचारा’ जैसे बुनियादी इंसानी जज़्बातों को ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ों से नवाजा है। हमारे देश में चुनाव जहाँ लोकतंत्र के लिए पर्व का रूप लेकर आते है वही ये हमारे समाज में आपसी भाईचारे और एकता को खत्म करने में किसी यम से कम नहीं है। सत्ता का नशा ऐसे समय चरम पर होता है जो हमारे आपसी प्यार को निगल जाता है और दीखते है तो सिर्फ वोट।

कई प्रत्याशी (सभी नहीं) इन दिनों चुनावी लाभ के लिए मुद्दे उठाते हैं और एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, जिसका कारण है कि पक्ष और विपक्ष के बीच रिश्तों में कमी आ गई है। सभी लोग एक-दूसरे पर बयानों के जरिए आक्रामक प्रहार करते रहते हैं और आपस में उलझते रहते हैं, जिसके कारण समस्याओं का तार्किक रिश्ता ही जैसे रुक गया है। सुधार के पक्ष में जो काम होने चाहिए वो नहीं हो पा रहे हैं। विकास की दिशा में भी ठोस कदम उठाना और ऐसी कई सारी चर्चाएं उठने ही नहीं पाती है और बात वहीं की वहीं धरी रह जाती है। चुनाव धार्मिक युद्ध बन जाते हैं, हिन्दू-मुस्लिम और जाति -पाति में फूट डाल देते हैं, प्रत्याशी नेता। चुनाव तो खत्म हो जाते हैं लेकिन वह फूट आजीवन चलती रहती है।

चुनाव में कुछ लोगों द्वारा इसे आपसी साख का प्रश्न बना लिया जाता है जो धीरे-धीरे जहर का रूप ले लेता है। बढ़ती प्रतिद्धंद्विता रिश्तों का क़त्ल करने लगती है। अगर कोई ऐसे समय साथ न दे तो मित्र भी दुश्मन लगने लग जाते है। मगर यह हमारी भूल है। कोई भी चुनाव आखरी नहीं होता है। और रिश्तों से बढ़कर तो कतई नहीं। हम पद पाने की होड़ में ये भूल जाते है कि हमसे पहले भी चुनाव हुए है और आगे भी होंगे। इसलिए कुछ वोटों के लिए परिवार के लोगों, मित्रों, सगे-सम्बन्धियों, पड़ोसियों और अन्य से दुश्मनी के भाव से पेश आना सही नहीं है। क्योंकि चुनाव की रात ढलते ही हमें अपने आगे के दिन इन्ही लोगों के साथ व्यतीत करने है।

ऐसा भी देखने में आता है कि कई प्रतिद्वंदी ऐसे समय अपनी पिछली हारों का बदला लेने को आतुर रहते है। और इस बदले कि आग में गाँवों में आपसी दंगे-फसाद शुरू हो जाते है। जो गाँव का वातावरण ख़राब ही नहीं करते; कई बार गाँव की पावन भूमि को लहूलुहान कर देते है। जो लम्बे तनाव का कारण बनती है। ऐसे समय हमें सोचना चाहिए कि चुनाव खेल कि तरह है और इसमें खेल भावना का महत्व है। हार-जीत जीवन में चलती रहती है। इसे अपनी अपनी साख का विषय न बनाये। हार को भूलकर एक समझदार नागरिक होने का परिचय दे और सहनशील बने।

दूसरी ओर जीते उम्मीदवार की जिम्मेवारी ऐसे समय और बढ़ जाती है। वह उसे वोट न करने वालों को भी अपना समझे। क्योंकि अब वो सभी के प्रतिनधि है। मगर दुर्भाग्य से कुछ जीते हुए उम्मीदवार इस बात को नहीं समझ पाते और वो बदलें की भावना से हारे हुए पक्ष को चिढ़ाते है। जिससे भाईचारे और आपसी तालमेल को ठेस पहुँचती है। जो आस-पास के वातावरण को ख़राब करती हुई पूरे गाँव को अपनी चपेट में ले लेती है। कई बार तो ऐसी छोटी-छोटी बातें भयानक मुद्दे बन जाती है। जो अंतत थानों और कोर्ट कचहरी तक पहुँच जाती है। जहाँ दोनों पक्षों को नुक्सान के अलावा कुछ नसीब नहीं होता।

इसलिए चुनाव के समय एक समझदार नागरिक होने का परिचय दे। चुनावी राजनीति में भाईचारे को बचाकर रखे। वोट का सम्मान तभी होगा जब हम एक दूसरे का सम्मान करेंगे। योग्य व्यक्ति को वोट देंगे तो साख के प्रश्न ही नहीं उठेंगे। प्रश्न नहीं उठेंगे तो शांति होगी। शांति होगी तो उचित तरीके से मतदान होंगे और सही प्रतिनिधि चुने जायेंगे और सही प्रतिनिधि ही जनहित के काम कर सकते है। इसलिए ऐसे समय चुनावी लाभ के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव, भाईचारे के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाडऩे का प्रयत्न नहीं करना चाहिए।

आजकल राजनीतिक प्रत्याशियों में मानवीयता विलोपित हो चुकी है। येन-केन-प्रकारेण वोट प्राप्ति ही लक्ष्य रह गया है। इसे रोका जाना चाहिए व राजनीतिक सुचिता का बीजारोपण करना चाहिए। धन-बल का प्रयोग कर क्षेत्र में माहौल खराब किया जाता है, बूथ कैप्चरिंग किया जाता है और मतदान दलों को बंधक बनाया जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए विशेष रूप से कानून में प्रावधान किया जाना चाहिए। कानून का उल्लंघन करने वाले संबंधित दलों के प्रत्याशी व कार्यकर्ताओं पर कड़ा जुर्माना लगाया जाना चाहिए और प्रत्याशी के चुनाव लडऩे पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और जो भी नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं। ऐसे लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया जाना चाहिए।

जब भी चुनाव घोषणा होती है, नेता लोग जनता को प्रलोभन, वादे, संप्रदायिकता, जाति के नाम पर लोगो में द्वेष पैदा करके चुनावी लाभ लेते नजर आते है। चुनावी लाभ के लिए एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं, विवादास्पद बयानबाजी करते हैं और अपना वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश करते रहते हैं। इसी प्रयास में वे जनता को गुमराह करते हैं और माहौल को खराब करते हैं। राजनीतिक लाभ के लिए वर्तमान में राजनीति का स्तर बहुत अधिक गिर गया है। सत्ता के लालच और विभिन्न पद पाने के लिए आजकल के नेता धर्म और जाति का सहारा लेकर अलग-अलग धर्म के लोगों को आपस में लड़वाने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। भड़काऊ भाषणों में शब्दों का चयन और मुद्दे ऐसे उठाए जाते हैं, जिससे आम जनता भड़कती है। अनर्गल बातें देश के शांतिप्रिय माहौल को बिगाड़ रही हैं। चुनावी लाभ के लिए होने वाले असंयमित और अमर्यादित बोल और भाषा पर लगाम लगाए जाने की सख्त आवश्यकता है।

About author 

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh


Related Posts

चीन से आगे होंगे तो आगे सोचना भी होगा।

April 25, 2023

चीन से आगे होंगे तो आगे सोचना भी होगा। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 19

अपने ही अपनों की आंखों मे तब खटकते

April 25, 2023

अपने ही अपनों की आंखों मे तब खटकते आज कि भागमभाग जिंदगी में हर कोई एक दूजे से आगे निकलना

द स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट एनुअल रिपोर्ट 2022

April 25, 2023

द स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट एनुअल रिपोर्ट 2022 विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएचओ) वार्षिक रिपोर्ट 202 ज़ारी वैश्विक स्तरपर

महिलाओं की राजनीति में बाधा बनते सरपंचपति

April 24, 2023

24 अप्रैल – राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस महिलाओं की राजनीति में बाधा बनते सरपंचपति चुनाव में खड़े होने और जीतने

24 अप्रैल – राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

April 24, 2023

बिखर गई पंचायतें, रूठ गए है पंच।भटक राह से है गए, स्वशासन के मंच।। राज्य सरकार स्थानीय नौकरशाही के माध्यम

पृथ्वी की रक्षा एक दिवास्वप्न नहीं बल्कि एक वास्तविकता होनी चाहिए। Earth day 22 April

April 21, 2023

(पृथ्वी दिवस विशेष, 22 अप्रैल) पृथ्वी की रक्षा एक दिवास्वप्न नहीं बल्कि एक वास्तविकता होनी चाहिए। मनुष्य के रूप में,

PreviousNext

Leave a Comment