Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

चाँद तोड़ कर कोई आपकी हथेली पर नहीं रखने वाला

 “चाँद तोड़ कर कोई आपकी हथेली पर नहीं रखने वाला” अस्तित्व और हक की जंग तो कीड़े मकोडे भी लड़ते …


 “चाँद तोड़ कर कोई आपकी हथेली पर नहीं रखने वाला”

अस्तित्व और हक की जंग तो कीड़े मकोडे भी लड़ते है। कुछ औरतें खुद को लाचार, बेबस, कमज़ोर समझते सहने की आदी बन जाती है। दमन करना पाप है तो सहना भी पाप है। ऐसे ही कई युवा ज़िंदगी की चुनौतियों से घबरा कर खुदकुशी कर लेते है या किस्मत के भरोसे उम्र ढ़ो रहे होते है। एक बात समझ लीजिए चाँद तोड़ कर कोई आपकी हथेली पर नहीं रखने वाला, सबको अपने हिस्से की जंग खुद ही लड़नी पड़ती है। लड़ाई कोई भी हो लड़ने से पहले हार जाना आत्मा की मौत है। 

“ज़िंदगी भीख में नहीं मिलती ज़िंदगी बढ़कर छिनी जाती है, जब तक ऊंची न हो ज़मीर की लौ आंख को रौशनी नहीं मिलती” ज़िंदगी ऐसे नहीं मिलती।

कहाँ मिलता है कुछ भी यहाँ आसानी से संघर्ष के रथ पर सवार होकर विद्रोह के आयुध से लड़ी जाती है ज़िंदगी की जंग। इतिहास गवाह है मराठाओं से लेकर आम आदमी ने आज़ादी की ख़ातिर अंग्रेजों के साथ मानसिक और शारीरिक जंग लड़ी है। सहना पाप है, हक की ख़ातिर आवाज़ उठाकर ज़मीर को ज़िंदा रखने को जीना कहते है, वरना उम्र कट रही होती है। किसी वंचित को उसके बुनियादी इंसानी हक बिना लड़े नहीं मिले। अश्‍वेतों ने लंबे समय तक संघर्ष करके ये अधिकार हासिल किया तब जाकर अमेरिका के संविधान में अश्‍वेतों को समान अधिकार दिए गए। और इतनी लंबी लड़ाई तो पूरी मानवता के इतिहास में किसी ने नहीं लड़ी, जितनी लंबी लड़ाई औरतों ने लड़ी है। महज सौ साल पहले दुनिया के किसी भी हिस्‍से में औरतों को वोट देने का अधिकार नहीं था। न्‍यूजीलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बना, जिसने महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपने मत देने का अधिकार दिया। और आज भी हर क्षेत्र में अपना स्थान बनाने औरत लड़ ही रही है।

भारत के संविधान में समलैंगिकता अपराध थी, जिसके लिए जेल हो सकती थी। इसके खिलाफ बार-बार न्‍यायालय का दरवाजा खटखटाया गया, उसे डिक्रिमिनलाइज करने की मांग की गई, तब कहीं जाकर दो साल पहले फैसला हुआ। मानव अधिकार की परिभाषा करना सरल नही है। समाज में कई स्तर पर कई उपेक्षा और विभेद पाए जाते हैं। भाषा, रंग, मानसिक स्तर, प्रजातीय स्तर आदि, इन स्तरों पर मानव समाज में भेदभाव का बर्ताव किया जाता हैं।

सामाजिक व्यवस्था को ले लीजिए जब जब इंसान के हकों का हनन हुआ है तब तब समय-समय पर क्रांति की लौ प्रज्वलित हुई है। जात-पात, धर्म-अधर्म पर लाठी और पत्थर लेकर देश को जलाने वाले निरक्षरता, गरीबी, बेकारी, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता और जनसंख्या नियंत्रण पर आवाज़ उठाने की हिम्मत क्यूँ नहीं करते। क्यूँ एकजुट होकर जन जागृति अभियान नहीं चलाते अपने हक की ख़ातिर बन जाओ क्रांतिकारी, बिना मांगे माँ भी खाना नहीं देती जब बच्चा भूख से आहत होते रोता है तब सीने से लगाती है। परिंदों जाओ अपना हक छीनो समंदर से, घड़ा खाली है कंकड़ डालने से कुछ नहीं होगा। परिवर्तन संसार का नियम है आवाज़ उठाओ समस्या सुलझाओ, मांगे से जो ना मिले छीन कर ले आओ।

About author

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर
(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

टालने,बहानेबाजी, और विलम्बता से हो जाए परे!

June 24, 2022

 टालने,बहानेबाजी, और विलम्बता से हो जाए परे! डॉ. माध्वी बोरसे! समय नष्ट करता रहे, समय सबसे मूल्यवान, जीवन मुश्किल हो

आओ रिश्तो की खुशबू में नहलाएं

June 24, 2022

आओ रिश्तो की खुशबू में नहलाएं एड किशन भावनानी दिल के रिश्ते तोड़ने से भी नहीं टूटते दिमाग के रिश्ते

आओ तारीफ़ और प्रशंसा करें

June 24, 2022

एड किशन भावनानी आओ तारीफ़ और प्रशंसा करें तारीफ़ और प्रशंसा रूपी फूल की सुगंध रूपी सार्थक शक्ति से मनुष्य

डॉ. मोहन बैरागी को मिस्र, इजिप्ट में मिला हिंदी सम्मान

June 24, 2022

डॉ. मोहन बैरागी को मिस्र, इजिप्ट में मिला हिंदी सम्मान हिंदी साहित्य के राहुल सांकृत्यायन सम्मान से विभूषित हुए डॉ.

दुखे पेट पीटे सिर

June 24, 2022

 दुखे पेट पीटे सिर Jayshree birmi जम्मू कश्मीर में 370 हटाने से दूसरे कई मुद्दों पर चुप रहने वाले पेट्रोल

इंसानियत कहां हैं?

June 24, 2022

 इंसानियत कहां हैं? Jayshree birmi 25 मई की खबर हैं ये जब इंसानियत की तौहीन कर हैवानियत ने नंगा नाच

Leave a Comment