Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

चल पहल कर!

 चल पहल कर! किसी के भरोसे क्यों रहना, सब करें उसके बाद क्यों करना, भेड़ चाल क्यों जरूरी है चलना, …


 चल पहल कर!

किसी के भरोसे क्यों रहना,
सब करें उसके बाद क्यों करना,
भेड़ चाल क्यों जरूरी है चलना,
चल तू ही पहल कर,
किसी बात से तुझे नहीं डरना।।
किसी की राह, क्यों तकना,
बीतने के बाद क्यों समझना,
किसी के बाद में क्यों बनना,
चल तू ही पहल कर,
अनुभव से क्यों है डरना।।
किसी के लिए क्यों ठहरना,
आलोचनाओं से क्यों बिखरना,
हर कदम पर जरूरी नहीं संभलना,
चल तू ही पहल कर,
जोखिम उठाने से ज्यादा क्या डरना।।
क्यों अपने लक्ष्य से भटकना,
क्यों किसी की राहा करते हुए अटकना,
क्यों सटीक निर्णय करने से उलझना,
चल तू ही पहल कर,
खुद पर भरोसा तुझे हे रखना।।
क्यों बात बात पर एहसान जताना,
अस्थाई है सब, क्यों दिल लगाना,
पूरा हो ना हो तेरा हर सपना,
चल तू ही पहल कर,
तेरी योग्यता को तुझे ही परखना।।
सुन तेरी अंतरात्मा को क्या है कहना,
हर नहीं दिन के साथ तुझे है निखरना,
साहस के साथ तुझे हे बढ़ना,
चल तू ही पहल कर,
समस्त गुणों से तुझे हे सवरना।

About author

चल पहल कर!
डॉ. माध्वी बोरसे।
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

Safalta jhak mar kr aayegi by Jitendra Kabir

September 13, 2021

 सफलता झक मारकर आएगी बहुत संभव है कि तुम पर तुम्हारे अपने ही घर वाले सवाल उठाएं, मन की आवाज़

Teej by dr indu kumari

September 13, 2021

 तीज पावन है तीज त्योहार मनाऊं मैं लक्ष्मी घर आए दीप जलाऊं  मैं गौरी शिव के आराधना कर आऊं लम्बी

Ganeshotsow by da indu kumari

September 13, 2021

 गणेशोत्सव गणपति बप्पा विघ्न हरता कहलाते है गणेश महोत्सव पूजन कर मनाते है गणेश चतुर्थी पवित्र हिन्दू त्योहार है  श्रद्धा

Hum jooth nhi bolte by Jitendra Kabir

September 13, 2021

 हम झूठ नहीं बोलते अजीब बात हैं ना! मुंह पर हम चोर को चोर, गुण्डे को गुण्डा और हत्यारे को

Badal rahi hai phir bhi duniya by Jitendra Kabir

September 13, 2021

 बदल रही है फिर भी दुनिया दुनिया अक्सर खिलाफ रही है नये बदलाव के, नयी सोच को किया जाता रहा

Bahuto ko myassar nhi by Jitendra Kabir

September 13, 2021

 बहुतों को मयस्सर नहीं सिर्फ थककर चूर  हो जाने पर ही नहीं या फिर कुदरत की रवायत निभाने  के लिए

Leave a Comment