Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह …


चल चला चल राही तू!

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!
चल चला चल राही तू,

मुसाफिर तू कभी रुकना ना,
रुकना ना, कभी झुकना ना,
तेरेते रह तू आगे से आगे,
डूबना ना, फिसल ना ना,
हंसते रहना, मुस्कुराते रहना,
रोना ना कभी खोना ना!

संभल संभल के कदम को रखना,
थकना ना, ठहरना ना,
निडर होकर आगे बढ़ना,
सहना ना, तू कभी बहना ना,
चल चला चल राही तू,
मुसाफिर तू कभी रुकना ना!

करके दिखा जीवन में तू, सपने किसी से कहना ना,
देते जा तू देते जा, पर कभी किसी से लेना ना,
खुद्दारी हो तुझ में इतनी, मेहनत करे बिना रहना ना,
चल चला चल राही तू,
मुसाफिर तू कभी रुकना ना!

अवसरों पर ध्यान देना,
कभी अवसर को नकारना ना,
सब को अपनाते जाना,
कभी किसी को धिक्कार ना ना,
समेट कर रखना खुद को,
कभी खुद से बिछड़ना ना,
चल चला चल राही तू,
मुसाफिर तू कभी रुकना ना!

पूरा हो तेरा हर सपना,
बनाए तुझे हर कोई अपना,
किसी से कभी ना तू डरना,
जीना हो या फिर हो मरना,
हर परिस्थिति को अपनाते जाना,
इस माध्वी का, इतना ही कहना,
हंसते, मुस्कुराते, जिंदगी को जीना,
चल चला चल राही तू,
मुसाफिर तू कभी रुकना ना!
चल चला चल राही तू,
मुसाफिर तू कभी रुकना ना!

डॉ माध्वी बोरसे!
लेखिका !
(रावतभाटा) राजस्थान


Related Posts

kavita sanwr jati hai by ajay prasad

June 9, 2021

संवर जाती है धूप जब भी बर्फ़ सी पिघल जाती हैतो मजदूरों के पसीने में ढल जाती है।ठंड जब कभी

kavita sarkari aakado me by jitendra kabir

June 8, 2021

सरकारी आंकड़ों में… सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती हैं सिर्फ मौतें, दर्ज नहीं होती लेकिन उनमें मरने वालों की तकलीफें,

kavita sakhi keh do by anita sharma

June 8, 2021

 सखी कह दो” अभिलाषा में आशा जोड़ू,सखी कह दो मैं क्या जोड़ू।इच्छाओं का अंबार समेटू,या अनुरागी पथ को चुन लूँ।

kavita- pacchim disha ka lamba intjaar by mahesh keshari

June 8, 2021

 पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार..  मंझली काकी और सब  कामों के  तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और  बैठ

gazal-ateet ka geet by abhishek sudhir

June 8, 2021

 ग़ज़ल :- “अतीत का गीत” आज तुम  पर  कोई  गीत  लिखने  बैठा  हूँ  तुम्हें इस  मन  का   मीत  लिखने   बैठा   हूँ 

kavita bhavnayen barish ki by sudheer shrivastav

June 7, 2021

 भावनाएँ बारिश की ****************ये भी अजीब सी पहली हैकि बारिश की भावनाओं को तोपढ़ लेना बहुत मुश्किल नहींसमझ में भी

Leave a Comment