Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन- डॉ. माध्वी बोरसे!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन! चलो निकालें सप्ताह में एक दिन, जिसमें खुद का साथ हो,बस खुद से बात …


चलो निकालें सप्ताह में एक दिन!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन- डॉ. माध्वी बोरसे!
चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,

जिसमें खुद का साथ हो,
बस खुद से बात हो,
चाहे दिन या रात हो,
कैसे भी हालात हो!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
लफ्ज़ों पर हो कई सवाल,
यह दुनिया है या माया का जाल?
क्या पाया क्या खोया इस साल?
खुद से पूछे खुद का हाल!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
पूछें, कितना प्यार खुद से किया?
कितना दर्द गैरों को दिया?
कितना खुलकर हे जिया?
कितनों का है हक लिया?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
आईने के सामने बैठे एक बार,
थोड़ी देर के लिए छोड़े श्रृंगार,
जाने कैसे है हमारे आचार विचार?
क्या बाकी है हम में शिष्टाचार?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
जाने, खुद को क्या है गम?
किसे ढूंढते हैं हम हरदम?
क्या सही चल रहे हैं हमारे कदम?
कैसा महसूस कर रहे हे हम?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,पूछें
क्या हमसे यह जमाना है?
जहां हर कोई बेगाना है,
बस धन दौलत ही कमाना है,
और इस दुनिया से एक दिन खाली हाथ जाना है!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,पूछें
कितनों के हमने घर बसाऐ?
कितनों के घर हमने जलाए?
इंसान बनके हम इस धरती पे आए,
इंसानियत के नाते, क्या हम कुछ कर पाए?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
खुद को थोड़ा नजदीक से जाने,
खुद को सबसे ज्यादा पहचाने,
व्यस्त होने के ना करें बहाने,
खुद से मिले हुए जमाने!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन!
चलो निकालें सप्ताह में बस एक दिन!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

यह अवश्यंभावी है-जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

यह अवश्यंभावी है जिस समाज में कलाकारोंका समर्पणकला की उत्कृष्टता के लिए कमऔर उससे होने वालीकमाई व शोहरत पर ज्यादा

प्रचार से परे है सच्चाई- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्रचार से परे है सच्चाई कानून के राज कीडींग हांकी जा रही है आजकल बहुत,लेकिन इस मामले मेंहत्या, बलात्कार, दबंगई

विघटन के बीज- जितेन्द्र ‘कबीर

March 25, 2022

विघटन के बीज एक घर के दो सदस्य,एक शाकाहारी पूर्णतःलेकिन दूसरे को मांसाहार भाए,खाने के ऊपर रोज ही उनकीआपस में

प्राथमिकता में नहीं- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्राथमिकता में नहीं जब सरकारें देने लगें सियासी लड़ाईयां जीतने परध्यान ज्यादाऔर ज़िंदगी की लड़ाई हार रहीजनता पर कम,तो समझ

प्रेम रहेगा हमेशा- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्रेम रहेगा हमेशा हम पहले इंसान नहींजो प्रेम में हैंऔर विश्वास करोकि हम आखिरी भी नहीं होंगे,नफरत, घृणा, स्वार्थ, हिंसाऔर

चुप्पी की कीमत- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

चुप्पी की कीमत अगर तुम्हारा कोई पड़ोसीकुछ हथियारों और गुण्डों के बल परधावा बोल देतुम्हारे घर पर कब्जे के लिए,तो

Leave a Comment