Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

घायल परिंदे| Ghayal Parinde

घायल परिंदे मत उड़ इतना मासूम परिंदेसब जगह रह देखें हैं दरिंदेमाना आसमां बड़ा बड़ा हैंलेकिन वहां भी छैक बड़ा …


घायल परिंदे

मत उड़ इतना मासूम परिंदे
सब जगह रह देखें हैं दरिंदे
माना आसमां बड़ा बड़ा हैं
लेकिन वहां भी छैक बड़ा हैं
नहीं वहां हैं तेवारी कोई सुरक्षा
पग पग पर हैं कड़ी परीक्षा
पहचान नहीं पाओगे तुम जो
काट काट के वे खायेंगे तुम्हें
एक दो नहीं वे पैंतीस टुकड़े
कर डालेंगे क्या तुम ये सह पाओगी
माना तुम्हे आजाद हैं होना
जिसे तुम समझो हो बंधन
हैं नहीं ये बंधन तेरी सुरक्षा
जिसे छोड़ आजाद न होगी
अपना कवच तू खुद तोड़ेगी
सोचो समझो बचाओ शील
जो हैं तुम्हारे जीवन की रीत
मत सोचो तुम्हे नहीं आजादी
रखते रत्नों को सब लॉकर में
अमूल्य हो तुम सब के लिए
तभी तो संभाले सब से ज्यादा
बस करो अब उड़ना रानी
मतलबी हैं ये दुनियां फानी

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा

आह्वान- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

आह्वान मद्यपान निषेध मेरे देश के नौजवानोंतू है मौजों की रवानीहै भारत माँ के लाल वेशकीमती तेरी जवानीमद्यपान नहीं जिन्दगानीबीड़ी

देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद विभूति सादगी के किया सुशोभित देशऱत्न प्रथम राष्ट्रपति के ऊँचे पद मुस्कान भरी मुखमंडल परअंकुरित न हो सके

बच्चन जी- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

बच्चन जी सत्ताइस नवंबर उन्नीस सौ सात कोकायस्थ कुल में पैदापिता प्रताप नारायण के घरमां सरस्वती देवी की कोख सेप्रतापगढ़

Leave a Comment