Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

घर के बुजुर्ग उपेक्षित क्यों!

 घर के बुजुर्ग उपेक्षित क्यों! ये घर घर की कहानी हैं जो हरदम हम देख रहें हैं।लेकिन जिम्मेवार कौन,ये प्रश्न …


 घर के बुजुर्ग उपेक्षित क्यों!

Jayshree birmi

ये घर घर की कहानी हैं जो हरदम हम देख रहें हैं।लेकिन जिम्मेवार कौन,ये प्रश्न हैं तो, हम खुद ही हैं जिम्मेवार आज के इस प्रश्न के।वो कहानी थी न,ससुर को वृद्धाश्रम भेज ने के लिए बहु खुशी खुशी समान बटोर रही थी जैसे बेटी का दहेज, लेकिन जब कंबल हाथ में लिया तो उसे आधा कटा पाया तो वह चिल्लाई कि उस कंबल को किसने काटा था।तो उसी के बेटे ने कबूल किया कि वह काम उसीका था तो पूछा कि क्यों किया था ऐसा गंदा काम तो बेटे का जवाब था,“ मां जब तुम भी बड़ी हो जाओगी तब मुझे कंबल लाना नहीं पड़े इस लिए मैंने आधा काट लिया हैं।“

तब समझो कि दोनों के शरीर से खून ही सुख गया था।सारा सामान बऊजी की अलमारी में रख दिया और वृध्धाश्रम जाने वाली बात को भूल गए सब।बच्चे को ये सिख हम ही देते हैं और जब अपने पर आती हैं तो आंसू गिराते हैं।बचपन से सब अपने माता पिता का आदर करेंगे तो बच्चे भी उनका आदर तो करेंगे ही किंतु जब आप भी वयस्क हो जाओगे तब आपके साथ वे वही व्यवहार करेंगे जो आपने अपनों के साथ किया था।अगर अच्छा किया तो अच्छा ही पाओगे ये बात पक्की हैं। कहतें हैं बेटे ही भेजते हैं अपने मेटा पिता को वृद्धाश्रम लेकिन कभी कोई कंवारे लड़के ने भेजा हैं अपने माता पिता को वृद्धाश्रम नहीं बहुके आने के बाद ही ये शुरू होता हैं।

 सारा दिन काम पर व्यस्त रहने वाले पति को जब शाम घर पर आने पर जिसकी भी शिकायत की जाएं उसी की शामत आ जाती हैं फिर वह माता पिता हो या बच्चें।

सामंजस्य से रहने वाली औरतें दुरंदेश होने की वजह से परिस्थितियों को समझ कर उसका निकाल लाती हैं ।वह लघु दृष्टि की नहीं होती जो क्षणिक लाभ देखें।

 कईं बार माता पिता का जिद्दी स्वभाव भी जिम्मेवार होता हैं।जो नई पीढ़ी के साथ समंज्यस नहीं बना पाने की स्थिति में ऐसे हालात पैदा कर लेते हैं।

 घर के बड़े बूढ़े समझदार हो तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी,वैसे ही गृहिणी भी समझदार हो तो सोने में सुहागा मिल जाता हैं।वयस्कों को एक बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि बेटी का अपना घर हैं तो उसे उनके हिसाब से चलने दें फालतू मे ज्ञान न दे कि उसे उस घर में कैसे रहना हैं या फिर अपने घर आई बेटी को मन सम्मान भेंट सौगद सब दे किंतु अपने घर के प्रश्नों से दूर रखें और बहु का सम्मान हनन न होने दें।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति

July 12, 2023

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति यदि मैं आज किसी के पसंद अनुसार चलती, या सरल भाषा मे अगर ये

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं?

July 12, 2023

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं? हाल के वर्षों में नदियों के पानी से डूबने वाले क्षेत्रों में शहरी बस्तियां

अब जीएसटी चोरी की तो ईडी का डंडा चलेगा

July 12, 2023

अब जीएसटी चोरी की तो ईडी का डंडा चलेगा  विपक्ष ने टैक्स आतंकवाद की संज्ञा दी जीएसटी काउंसिल की 50

सही अवसर की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा वर्तमान अवसर का उपयोग करें

July 12, 2023

सही अवसर की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा वर्तमान अवसर का उपयोग करें बेकार बैठने से बेहतर है कि आपके पास

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा

July 12, 2023

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा डिग्रीयां तो पढ़ाई के खर्चे की रसीदें है – ज्ञान तो वही है जो किरदार

तीर्थयात्रा खुद की खोज का एक समग्र अनुभव है।

July 8, 2023

तीर्थयात्रा खुद की खोज का एक समग्र अनुभव है। धार्मिक तीर्थ स्थल भी लोगों के लिए प्रेरणा और प्रेरणा का

PreviousNext

Leave a Comment