Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

घमासान

 घमासान क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म घुट …


 घमासान

जयश्री बिरमी,अहमदाबाद

क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन

कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म

घुट घुट के मार रहें हैं लोग या मर मर के जी रहे हैं लोग

मासूमों के हाल बुरे हैं सपने देखने वाले सो कहां पा रहें हैं

आग सैलाब की लपटों में जुलसे जा रहें हैं परिवार

ये कहर ए खुदा नहीं हैं ये खुदगर्जी सियासत दानों की

लड़ रहें हैं आका और सह रही हैं रियाया

रहम करों ऐ सियासत दारों कुफ्र से डरो

जिसे जुलसा रहें हो वह खुदा का रहम हैं हम पर

मिटा दो ये खौफ पैदा करों नर्मदिली के वाकए

 जायेगी मीट इंसानियत कुछ नागवार हादसों में कहीं

कर्म ए खुदा को मांगिए खौफ ए खुदा नहीं

 स्वरचित जयश्री बिरमी,अहमदाबाद


Related Posts

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

March 4, 2023

भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने

धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं

March 4, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा

हे परमपिता परमेश्वर

March 4, 2023

भावनानी के भाव हे परमपिता परमेश्वर आपके द्वारा दिए इस जीवन में इन मुस्कुराहटों का हम पर एहसान है हर

हे परवरदिगार मेरे मालिक

March 4, 2023

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं

कविता: भारतीय संस्कृति में नारी | bharatiya sanskriti me naari

February 16, 2023

 भावनानी के भाव कविता:भारतीय संस्कृति में नारी  भारतीय संस्कृति में नारी  लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है समय आने

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

February 16, 2023

 भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment