Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

गुनहगार कौन???

गुनहगार कौन??? याद आ रही हैं वो कहानी जो छुटपन में मां सुनाया करती थी। एक चोर था ,पूरे राज्य …


गुनहगार कौन???

गुनहगार कौन???
याद आ रही हैं वो कहानी जो छुटपन में मां सुनाया करती थी। एक चोर था ,पूरे राज्य में चोरी करके आतंक मचाया हुआ था।गरीब हो या अमीर सब की संपतियों पर उसके नजर रहती थी और मौका मिलते ही हाथ साफ कर लेते उसे देर नहीं लगती थी।एक सिफत की बात थी कि पकड़ा नहीं जाता था।पहले तो सिपाहियों ने बहुत कोशिश की किंतु उसे पकड़ने में सफल नहीं हो पाए।दिन–ब–दिन उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी।और अब राजा को भी लगा कि उसे पकड़ना बहुत जरूरी था वरना राजमहल भी सलामत नहीं होगा।और अब सिपाही की जगह सिपासलार को ये काम सुपुर्द हो गया।बहुत सारे लोग घात लगा जगह जगह बैठ कर उसकी प्रतीक्षा करते रह जाते और शहर दूसरे हिस्से में घरफोड चोरी हो जाती थी।अब सभी मंत्रियों ने मिल राजा से सलाह मशवरा करके एक जल बिछाया जिसमे प्रजा को भी शामिल किया गया और पूरे शहर में सब जगह जगह छुप कर बैठ गए।कोई पेड़ पर बैठा तो कोई किसके घर की छत या दीवार पर बैठा ऐसे सब फेल गए और सोचा कि अब जायेगा कहां।लेकिन रानी भवन में चोरी हो गई ,रानी के सारे गहने गायब थे और पूरे राज्य में कोहराम मच गया।प्रजा ने भी बोलना शुरू कर दिया कि राजभवन ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों का क्या? और अफरातफरी का माहोल बन गया ।अब राजा ने खुद भेस बदलकर रात्रिभ्रमण कर ,जगह जगह जा हालातों का जायजा लिया और एक बहुरूपिए के बारे में पता चला,अब बहुरूपिए के पर नजर रखी गई और उसका असली रूप सामने आया।अब पहचान तो हो ही गई थी उसकी अब पकड़ने भी देर नहीं लगी। हथकड़ी लगा कर उसे कारागार में डाल दिया गया।राजा तो नाराज था ही,और प्रजा से जनमत लिया गया।सब ने उसे फांसी की सजा के पक्ष में ही मत दिया।अब उसकी फांसी देने का दिन आ गया।बड़े से मैदान में फांसी का मांचा बनाया गया और चारों और लोगो की भीड़ लगी हुई थी, सब नारे लगा कर उसकी फांसी की मांग कर रहे थे।अब नियम के हिसाब से उसकी आखरी इच्छा पूछी गई।उसने अपनी मां से मिलने की इच्छा जाहिर की ,जाहिर किया गया कि उसकी मां हाजिर हो।कुछ देर बाद एक ५०–५५ साल की औरत आई और उसे चोर के पास ले जाया गया।उसके हाथ तो हथकड़ियों में जकड़े हुए थे लेकिन जैसे ही उसकी मां उसके करीब पहुंची उसने उसकी नाक अपने दांतो से काट ली,बेचारी दर्द के मारे खूब चिल्लाई किंतु उसकी नाक तो कट चुकी थी।राजा को भी गुस्सा आया और प्रधानजी से उसको ऐसा करने का कारण पूछा।तब वह अपनी पूरी ताकत से चिल्ला कर बोला,” जब बचपन में मैने पहली छोटी सी चोरी की थी,किसी बच्चे की पेंसिल चुराई थी,तब अगर मेरी मां ने मुझे शाबाशी नहीं देकर, रोका होता,डांटा होता ,मारा होता तो आज मैं इतना बड़ा चोर नहीं बनता,मैं भी आम नागरिक की जिंदगी बीतता।’उसी गुनाह की सज़ा मैंने उसकी नाक काट कर दी हैं ताकि और मेरी मां ने जैसे मुझे चोरी करने पर शाबाशी दी, वैसा कर कई ओर माएं दूसरे चोरों को जन्म नहीं दे इस लिए मैंने अपनी मां को सजा दी हैं।अब मैं फांसी पर चढ़ने के लिए तैयार हूं।और उसे फांसी लग गई।’उसके गुनाहों की सजा उसे मिल गई और उसकी मां को उसके गुनाह की सज़ा मिल गई।
क्या ये आजकल के परिपेक्ष में नहीं है? सभी स्टार के पुत्र और पुत्रियों या आम नागरिक जो अपने बच्चों की जायज या नाजायज बातों को मान लेना उनके के लिए यथार्थ नहीं हैं। आज के बच्चों की हर मांग पूरी करना,उनके हर बुरे व्यवहार को अनदेखा करना सब हम उनकी जड़ों में तेल दे रहे हैं।कैसे पनपेगा वह पौधा जिसे पानी और खाद की जगह तेल डाल कर जड़ों को निष्क्रिय किया जाए।कैसे उनकी नाक को बचाएंगे यह भी प्रश्न हैं या, सब ठीक हैं, बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

मन ही सब कुछ है। आपको क्या लगता है आप क्या बनेंगे?

December 16, 2022

 मन ही सब कुछ है। आपको क्या लगता है आप क्या बनेंगे? बुद्ध ने कहा कि – ‘सभी समस्याओं का

नाथु ला दर्रा से तवांग तक वाइब्रेंट बॉर्डर योज़ना से बौखलाया विस्तारवादी देश

December 15, 2022

नाथु ला दर्रा से तवांग तक वाइब्रेंट बॉर्डर योज़ना से बौखलाया विस्तारवादी देश भारत सरकार बॉर्डर एरियाओं में लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर

महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं

December 15, 2022

Working indian women  महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं मौजूदा पितृसत्तात्मक मानदंड सार्वजनिक या बाजार सेवाओं को लेने में

अमेरिका का बयान – दुनिया हैरान | America’s statement – the world was shocked

December 12, 2022

भारत अब अमेरिका का सिर्फ़ सहयोगी नहीं बल्कि तेज़ी से उभरती हुई विश्व की महाशक्ति है भारत तरक्की की बुलंदियों

कामकाजी महिला से रत्ती भर कमतर नहीं गृहिणी | housewife is not an iota less than a working woman.

December 11, 2022

“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है?

December 10, 2022

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है? हमारे

PreviousNext

Leave a Comment