Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

story

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

गुड्डू एक चंचल और होशियार लड़का था। वह पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था और हमेशा स्कूल में सबसे आगे रहता …


गुड्डू एक चंचल और होशियार लड़का था। वह पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था और हमेशा स्कूल में सबसे आगे रहता था। खेल-कूद, चित्रकला और कहानियाँ सुनाने में उसका कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन जैसे ही परीक्षा का समय नजदीक आता, गुड्डू घबरा जाता।

उसका चेहरा उदास हो जाता, वह खाना कम खाने लगता और खेलने भी नहीं जाता। उसकी मम्मी ने कई बार पूछा, “क्या बात है गुड्डू? इतने चुप क्यों रहते हो?”

गुड्डू धीरे से बोला, “मम्मी, मुझे परीक्षा से बहुत डर लगता है। क्या होगा अगर मैं पास नहीं हुआ? सब हँसेंगे मुझ पर…”

मम्मी मुस्कुराईं और उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा। उन्होंने कहा, “डरना ठीक नहीं है बेटा। डर हमें कमजोर बनाता है। चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाती हूँ।”

**कहानी में छिपा सबक**
मम्मी ने बताया—
“बहुत समय पहले एक जंगल में छोटू खरगोश रहता था। वह बहुत तेज़ दौड़ता था और जंगल में सबका चहेता था। लेकिन जब जंगल में दौड़ की प्रतियोगिता की घोषणा हुई, तो छोटू डर गया। उसने सोचा, ‘अगर मैं हार गया तो सब क्या सोचेंगे?’

उसने दौड़ में भाग लेने से मना कर दिया। उसकी दादी ने उसे समझाया, ‘बेटा, असली बहादुरी हारने से नहीं डरने में है। अगर तू भाग नहीं लेगा, तो खुद को कभी जान ही नहीं पाएगा।‘

छोटू ने दादी की बात मानी, दौड़ में भाग लिया, और सबसे तेज़ दौड़ा। वह नहीं जीता, लेकिन उसने सबका दिल जीत लिया। और अगली बार वह दौड़ जीत भी गया!”

गुड्डू मुस्कुराया और बोला, “मतलब कोशिश करना ज़रूरी है, जीतना नहीं?”

मम्मी ने सिर हिलाया, “बिलकुल! मेहनत से अगर तैयारी करोगे, तो डर खुद ही भाग जाएगा।”

नया आत्मविश्वास
उस दिन से गुड्डू ने रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ाई करना शुरू किया। उसने टाइम-टेबल बनाया, बीच-बीच में आराम भी किया और खेलना भी नहीं छोड़ा। जब परीक्षा आई, तो वह न डर रहा था, न घबरा रहा था। उसने आत्मविश्वास से पेपर हल किए।

रिजल्ट आया—गुड्डू अच्छे नंबरों से पास हुआ। वह खुशी से उछल पड़ा और बोला, “अब मुझे परीक्षा से बिल्कुल डर नहीं लगता!”

कहानी की सीख:
डर को हराया जा सकता है, अगर हम उसे समझें और मेहनत से सामना करें। परीक्षा डरने की नहीं, खुद को साबित करने की घड़ी होती है। “डर के आगे ही जीत है।”

– डॉ. मुल्ला आदम अली
https://www.drmullaadamali.com
तिरुपति – आंध्र प्रदेश


Related Posts

Story parakh | परख

Story parakh | परख

December 31, 2023

 Story parakh | परख “क्या हुआ दीपू बेटा? तुम तैयार नहीं हुई? आज तो तुम्हें विवेक से मिलने जाना है।”

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी | bad time story

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी | bad time story

December 30, 2023

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी “मैं पूरे दिन नौकरी और घर को कुशलता से संभाल सकती हूं तो क्या अपने बच्चे

LaghuKatha – peepal ki pukar | पीपल की पुकार

December 30, 2023

लघुकथा  पीपल की पुकार ‘दादी मां दादी मां, आपके लिए गांव से चिट्ठी आई है’, 10 साल के पोते राहुल

Story – mitrata | मित्रता

December 28, 2023

मित्रता  बारिशें रूक गई थी, नदियाँ फिर से सीमाबद्ध हो चली थी, कीचड़ भरे मार्गों का जल फिर से सूरज

Story – prayatnsheel | प्रयत्नशील

December 28, 2023

प्रयत्नशील भोजन के पश्चात विश्वामित्र ने कहा, ” सीता तुम्हें क्या आशीर्वाद दूँ, जो मनुष्य अपनी सीमाओं को पहचानता है,

Story – praja Shakti| प्रजा शक्ति

December 28, 2023

प्रजा शक्ति  युद्ध का नौवाँ दिन समाप्त हो चुका था। समुद्र तट पर दूर तक मशालें ही मशालें दिखाई दे

Leave a Comment