Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

गुंजा के दाने

गुंजा के दाने रमणीय , मनमोहक , चमकदारगुंजा के दाने मन को हर जाते हैसुर्ख चटकीले लाल रंग लिये येकाले …


गुंजा के दाने

रमणीय , मनमोहक , चमकदार
गुंजा के दाने मन को हर जाते है
सुर्ख चटकीले लाल रंग लिये ये
काले रंग की जैसे टोपी पाते हैं ।।

सुंदर इतने कि देख लगे जैसे
स्वादिष्ट, स्वाद इसमें समाते हैं
लेकिन दिखने में जो सुंदर इतने
उसके भीतर विष खूब समाते हैं।।

गुंजा के जैसे ही मानव की दुनिया
बाहर से सुंदर अंदर शैतान समाते हैं
देखो कितने मासूम बच्चे , लड़कियां
खुबसूरती के भंवर में फंस जाते हैं।।

हर साल कितने ही बच्चों के अपहरण
लड़कियों संग बलात्कार सुर्खी में पाते हैं
इनमें से कुछ शातिर गुंजा के दाने से
परिचित सदस्य नकाब लगाए आते हैं।।

कैसे पहचाने कोई नकाब चेहरों के
कौन दिल के भीतर जहर रख जाते हैं
बदला , दुश्मनी , जलन के चलते आज
जहरीले गुंजा के दाने से मार जाते हैं।।

कहते कलयुग आएगा जल्द धरा पर
अभी बताओ कौन सा सत्य युग पाते हैं
कलयुग तो चल रहा है अभी भी जग में
इसी जहर को हम तो कलयुग बताते हैं।।

जितने रमणीय देखो हिमाचल वादी
वहीं आतंक , मौत की खाई , पहाड़ ढहना
मौत के बादल पग-पग में सब पाते हैं।।
कब कहां बादल फट जाएं कोई न जाने
हिमाचल गुंजा के दाने सा परिभाषित
हम कर जाते हैं।।

देखो आज देश की राष्ट्रीय कार्यकारिणी
गुंजा के दाने से समझ जनता चुन जाते हैं
वही देश के भीतर से स्वार्थ सिद्ध कर
गुंजा के दाने के भीतर सा गुण बन
देश की नींव हिला खोखला कर जाते हैं।।

परिवारों के भीतर भी झांकों कोई तो
सात वचन अब कहां रिश्तों मे समाते हैं
पवित्र गुंजा के दाने से सुंदर रिश्ते में इंसा
अब बाहर वाली का जहर घोल जाते हैं।।

गुंजा के दाने… ऊपर से
मनमोहक गुंजा के दाने…भीतर से
जहरीले गुंजा के दाने…
उफ्फ् ये गुंजा के दाने।।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र



Related Posts

Abhi abhi karwan gujrega kavita by vinod kumar rajak

August 3, 2021

अभी -अभी कारवां गुजरेगा अरे! अभी – अभी चौराहे की सड़कें जाम होगी नहीं पता क्यों? कारवां गुज़रेगा सरकार की

Dosti ka rang kavita by Jitendra kabir

August 3, 2021

 दोस्ती का रंग अपनी कमजोरियों पर शर्म, बड़े-बुजुर्गों का लिहाज, समाज में बदनामी के भय और अपने करीबियों के बीच

Mera beta happy kavita by vijay Lakshmi Pandey

August 3, 2021

    ” मेरा बेटा हैप्पी” मेरा बेटा मिट्टी खाता , बहुत बड़ा दुर्गुण है यह। हर समय शिकायत सुन

Olympic medal kaise aayenge by Jitendra Kabir

August 3, 2021

 ओलंपिक मेडल कैसे आएंगे? इस देश में राजनेता और उनके रिश्तेदार ही खेल संघों में जब तक सारे उच्च पद

Corona Kal ek dard kavita by vijay Lakshmi Pandey

August 3, 2021

 कोरोना काल …एक दर्द ..!!! दिन   सहम   गया । दिन   सहम   गया ।। वह  दबे पाँव भीतर जाकर , सांकल 

Manav mulya kavita by Sudhir Shrivastava

August 3, 2021

 मानव मूल्य बहुत अफसोस होता है मानव मूल्यों का क्षरण लगातार हो रहा । मानव अपना मूल्य स्वयं खोता जा

Leave a Comment