Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

गीध नहीं गर्व बनों

 “गीध नहीं गर्व बनों” समझो स्याही मेरा खून है, कल्पनाओं के वेगिले तरंग से उबलते खून टपकता है कलम के …


 “गीध नहीं गर्व बनों”

गीध नहीं गर्व बनों

समझो स्याही मेरा खून है, कल्पनाओं के वेगिले तरंग से उबलते खून टपकता है कलम के ज़रिए..

मैं वही लिखती हूँ जो महसूस करती हूँ,

हर सुबह एक नया ख़याल जन्म लेता है। किसी तस्वीर को अपना विषय बनाते,

चिंतनशील विचार दुनिया का प्रतिबिम्ब देखने की लालसा में निकल जात है कल्पनाओं के रथ पर सवार होते।

उम्मीदें, सपने, जीने की जद्दोजहद हर रोज़ लिखती हूँ, छपते भी है पर आज,

मुझे लिखनी है विकृत मानसिकता वाले दरिंदों के मानस पटल की गतिविधियां,

“क्या हर गीध के भीतर किसी तितली को दबोचने का उन्माद पलता होगा” 

तुम सशक्त हो, मर्द हो तो क्या अधिकार मिल जाता है किसीके घर की मर्यादा को खंडित कर दो। तुम्हारी वासना का वेग, और आवेग की चरम क्या किसी मासूम की इज्जत से ज़्यादा मूल्यवान और शिद्दत वाली होती है। एक पल, महज़ एक पल का चिंतन हादसे के अंजाम को रोक सकता है। क्या एक पल ठहर कर जो कृत्य करने जा रहे हो उसके परिणाम के बारे में नहीं सोच सकते? 

उछाल भरी तीव्रता क्यूँ उबल पड़ती है बेबसी को तार-तार करते। अगर अपने घर की इज्जत एक बार भी नज़र को नीचा करवाते झांक ले उस एक लम्हें को रोक कर तो शायद एक ज़िंदगी उधड़ने से बच जाए। कोई धागा ऐसा नहीं बना जो उस हादसे के बाद चीर फाड़ हुई आत्मा की तुरपाई कर सकें। कैसा वेगिला जुनून होता होगा हवस की आँधी का जो किसी अबला की ज़िस्त को उज़ाड कर तबाह करने पर अमादा हो जाता होगा।

पन्नें फट जाते है उस वेदना को झेलते, कैसे लिखे कोई? बलात्कार सिर्फ़ एक घटना नहीं, मौत होती है किसी मासूम की। मांस के टुकड़ो का सेवन चंद पलों की भूख मिटाता जरूर है, पर जिसे काटकर खाया है आपने उसकी पीड़ा महसूस की है कभी? वह लाश भीतर से खाली हो जाती है। एक चोट नखशिख दर्द दे जाती है, ताज़िंदगी उभर नहीं पाती वह ज़ख़्म नाशूर बन जाता है।

ऐसे हादसों में लोग कहते है लड़की की इज्जत लूट गई, कोई ये क्यूँ नहीं कहता कि लूटने वाले ने अपने संस्कारों की इज्जत लूटी, अपने माँ बाप की आबरू को तार-तार कर दिया। सिर्फ़ लड़की पर ही लांछन क्यूँ? जब कि करतूत कोई ओर करता है। सबसे बड़ा गुनहगार तो वह दरिंदा होता है।

क्या रात के किसी पहर नींद नहीं आने पर उस हवसखोर को शिकार का लाचार चेहरा, उसकी पीड़ा और मुझे बख़्श दो वाली गुहार लगाती आवाज़ याद नहीं आती होगी? कैसे उस पाप का बोझ सहता होगा। अपने घर की बहन बेटियों में दबोची गई तितली का चेहरा भी तो दिखता होगा, तब खुद को माफ़ कैसे करता होगा? हवसपूर्ति के खेल का शिकारी आईने में खुद को कैसे देखता होगा। माथे पर लिखी किसीके बर्बादी की मोहर हंसती होगी तब डूब मरने का एहसास तो होता होगा। 

कलम धगधगता शीशा उगल रही है, शब्द संयम खो रहे है, मन में बवंडर उठ रहा है। आख़िर क्यूँ ऐसी घटनाएं हर कुछ दिन बाद होती रहती है। क्यूँ राह चलती लड़की मौका लगती है, ज़िम्मेदारी नहीं। महज़ इसलिए कि किसी और की अमानत है, अपनी नहीं। एक बार, बस एक बार उस हल्के ख़याल को झटक कर परे हटा दो और सोचो इस जगह मेरी बहन होती तो? एक बार सम्मान देकर देखो अपने आप अपनी नज़र में उपर उठ जाओगे, गीध नहीं गर्व बनों।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

(राष्ट्रीय बालिका दिवस – 25 सितंबर)

September 24, 2022

(राष्ट्रीय बालिका दिवस – 25 सितंबर)लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है। हमेशा देश में 10वीं और

अलविदा सत्य प्रकाश उर्फ राजू श्रीवास्तव

September 23, 2022

अलविदा कॉमेडी के नूर मनोरंजन भरपूर – हंसी चिकित्सा के धनी को सैल्यूट हंसी हमारे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य

अवैध लोन ऐप की भरमार, बना रही धोखे से कर्जदार

September 22, 2022

अवैध लोन ऐप की भरमार, बना रही धोखे से कर्जदार अनधिकृत डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन की बढ़ती संख्या

मी – टाइम (Me-time) by kishan bhavnani

September 21, 2022

मी – टाइम मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा और तनाव मुक्त जीवन के लिए खुद के साथ समय बिताना बेहद फायदेमंद

बच्चों को भेड़ चाल का हिस्सा मत बनाइए

September 21, 2022

“बच्चों को भेड़ चाल का हिस्सा मत बनाइए” आज के दौर में अभिभावकों के अंदर अपने टहनी से नाजुक बच्चों

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर 2022 पर विशेष

September 21, 2022

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर 2022 पर विशेष पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।  सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ आओ

Leave a Comment