Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

गांधीजी के सिद्धांत व विचार | Gandhiji ke siddhant aur vichar

भावनानी के भाव गांधीजी के सिद्धांत व विचार सत्य अहिंसा शांति धर्मनिरपेक्षता धार्मिक बहुलवाद और अधिकारों के लिए लड़ना सत्याग्रह …


भावनानी के भाव

गांधीजी के सिद्धांत व विचार

गांधीजी के सिद्धांत व विचार | Gandhiji ke siddhant aur vichar

सत्य अहिंसा शांति धर्मनिरपेक्षता
धार्मिक बहुलवाद और अधिकारों के लिए
लड़ना सत्याग्रह का सहारा
गांधीजी के सिद्धांत थे

राजनीतिक नैतिकतावादी उपनिवेशवाद विरोधी
दूरदर्शी नेतृत्व अहिंसात्मक दृष्टिकोण
बाधाओं के खिलाफ एकजुटता
गांधीजी के विचार थे

गांधी जी का सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार
के लिए पांच बार नामांकन किया गया
ग्रेट ब्रिटेन ने मृत्यु के 21 साल बाद उनका सम्मान
डाक टिकट जारी किया जिनके खिलाफ लड़ाई किए थे

दो अक्टूबर महात्मा गांधी के विश्वासों आदर्शों
शिक्षाओं अहिंसात्मक दृष्टिकोण को
उत्सव के रूप में याद कर उनका पालन
करने का दिन है जो उनके स्वपन थे

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


Related Posts

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

हार कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

हार! बेहतर होने का अनुभव देती हैं,यह तो सीरीफ एक परिस्थिति है,सफलता का सबसे बड़ा रास्ता होती है,कुछ देर की

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा

Leave a Comment