Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’

गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी …


गलतियां दोहराने की सजा

गलतियां दोहराने की सजा-  जितेन्द्र 'कबीर'

देश में कोरोना की पहली लहर
हमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद ही
बुलाई थी,
जब इतनी चेतावनियों के बावजूद
बिना पुख्ता जांच-पड़ताल के
हजारों यात्रियों की आवाजाही यहां
करवाई थी,
सिर्फ देश की सीमाएं बंद करके
रोका जा सकता था जब आसानी से
वायरस को देश में आने से,
तब देश के कर्णधारों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए
देशव्यापी लाॅकडाउन लगाकर
जाने कितने लोगों के काम धंधों,
जाने कितने लोगों की नौकरियों,
न जाने कितने विद्यार्थियों की शिक्षा एवं
कैरियर की और
न जाने कितने लोगों की जिंदगियों की
वाट लगाई थी,
महामारी के पहले झटके से सबक लेकर
स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के बजाय
तब हमारी सरकारों ने कोरोना से जंग जीतने की
अहंकार भरी घोषणाएं करवाई थी,
उसी अहंकार के चलते
देश में कोरोना की दूसरी लहर
इतनी मारक होकर आई थी,
अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडरों, जरूरी उपकरणों
व दवाइयों की कालाबाजारी ने
बीमारी से पीड़ित जनता दर दर तभी भटकाई थी,
राजनैतिक रैलियों और धार्मिक आयोजनों की कीमत
देश के लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाकर
फिर चुकाई थी,
अब तीसरी लहर से पहले भी चुनावी रैलियां करके
फैला लिया बीमारी को अच्छे से सब जगह,
उसके बाद भीड़ पर प्रतिबंध लगाने की बात
सरकारों के संज्ञान में आई है,
यह जो लाखों की संख्या में बढ़ रहे हैं
रोज मरीज
बार – बार वही गलतियां दोहराने की सजा
हमनें पाई है।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है

March 5, 2023

भावनानी के भाव  स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है नवाचार में तीव्र विकास करने समृद्ध करने भाषाई अड़चनों को

हे राम!! | Hey ram

March 5, 2023

हे राम!! राम तुम क्यूं ना बन सके प्रैक्टिकल,कि जब मेघनाद का तीर लगा लखन को,क्यों तुमने द्रवित किया था

द्वारिका में बस जाओ

March 5, 2023

 द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे,

सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra

March 5, 2023

 सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर

मेरी दादी माँ| meri dadi maa

March 5, 2023

 मेरी दादी माँ आज की शाम मेरी दादी के नाम कर रहे सब आज तुम्हारी बातें इकट्ठा हो घर के

नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

March 4, 2023

 भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो  अटके काम बनाना है तो 

PreviousNext

Leave a Comment