Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, poem

गम की बदली

 ‘गम की बदली’ मैं गमों से भरी सराबोर बदली हूँ बरसना मेरी फ़ितरत है, यूँ तरस खाकर पौंछिए नहीं रहने …


 ‘गम की बदली’

गम की बदली
मैं गमों से भरी सराबोर बदली हूँ बरसना मेरी फ़ितरत है, यूँ तरस खाकर पौंछिए नहीं रहने दीजिए यह अविरत बहते रहेंगे कब तक जद्दोजहद करेंगे ..

“यह अश्कों की धारा नहीं मेरी तथ्यहीन आँखों का पहला और आख़री प्यार है मेरी व्यथाओं का सार है”

यह बूँदें दर्द की ख़लिश नहीं वैभव है मेरी आँखों का, मिले है ईश के आशीष से जन्मी तब से मेरे साथ है..

वेदना का अंबार नहीं साथी है मेरी तन्हाई के, ये महज़ आँसू नहीं रात के आलम में नींद से जूझते गमों की गिनती करते कट रहे लम्हों के संगी है..

न बह सकी मजबूरी में कुछ बूँदें अपनों की खुशियों की ख़ातिर उस बूँदों का प्रतिबिम्ब और ख़्वाबगाह के भीतर खेलती पुतलियों की रंगत है..

मत मिटाईये मेरी खुशियों को यही तो मेरी पहचान है, मेरी ज़िस्त की तरह बेरंग सी बूँदें मेरी अँखियन को बहुत अज़िज है। 

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

सफलता के मंत्र – चन्दा नीता रावत

December 15, 2021

।। सफलता के मंत्र ।। सफलता के मंत्रो को हमेगुनगुनाना है राहों के काटों से हँस कर गुजरजाना है संकल्प

ऐ नदी ऐ नदी- चन्दा नीता रावत

December 15, 2021

ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदीकल कल करती बहती है किनारो पर तुम्हारे जिन्दगी बसा करती हैविशाल रूप

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो – डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो! अगले जनम मोहे नारी ही कीजो,दोबारा मेरे माता-पिता को, प्यारी सी बिटिया ही दीजो,फिर

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म

Leave a Comment