Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

गन्दा खेल- जितेन्द्र ‘कबीर’

गन्दा खेल वोट तन्त्र में जनता के विचारों की रेलकुछ को पहुंचाती हैराजगद्दी परऔर कुछ को पहुंचादेती है सीधा जेल, …


गन्दा खेल

गन्दा खेल- जितेन्द्र 'कबीर'
वोट तन्त्र में जनता के

विचारों की रेल
कुछ को पहुंचाती है
राजगद्दी पर
और कुछ को पहुंचा
देती है सीधा जेल,

इसीलिए तो…
उसकी दशा-दिशा बनाने
बिगाड़ने में लगे रहते हैं
रात-दिन चौबीस घंटा
राजनीतिक दलों के मीडिया,
‘सोशल मीडिया सेल’

बड़े-बड़े कारपोरेट घरानों
के साथ मिलीभगत से चलता है
विरोध और समर्थन का
उनका यह गन्दा खेल

बार-बार हजार बार झूठ को
जनता के आगे पेल-पेल
यह शातिर
हो जाते हैं कामयाब
लोगों की अपने ढंग से
सोचने विचारने की शक्ति को
करने में फेल।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment