गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा
गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा तिरंगा है हमारी जान, कहलाता देश की शान। तीन रंगों से बना तिरंगा, बढ़ता हम …
Related Posts
बड़े बने ये साहित्यकार
November 21, 2022
बड़े बने ये साहित्यकार बंटते बंदर बांट पुरस्कार ।दौड़ रहे है पीछे-पीछे,बड़े बने ये साहित्यकार ।। पुरस्कारों की दौड़ में
धन के सँग सम्मान बँटेगा| Dhan ke sang samman batega
November 19, 2022
आजकल परिवार में हो रहे विवाद और आपसी बंटवारें के संदर्भ में सीख देती हुई मौलिक कविता धन के सँग
घायल परिंदे| Ghayal Parinde
November 19, 2022
घायल परिंदे मत उड़ इतना मासूम परिंदेसब जगह रह देखें हैं दरिंदेमाना आसमां बड़ा बड़ा हैंलेकिन वहां भी छैक बड़ा
सबके पास उजाले हो| sabke pas ujale ho
November 19, 2022
सबके पास उजाले हो मानवता का संदेश फैलाते,मस्जिद और शिवाले हो ।नीर प्रेम का भरा हो सब में,ऐसे सब के
हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं
November 19, 2022
हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं जमीन से शासन को चुना लगाने माहिर हूं शासन या रेल्वे में
व्यंग्य कविता-मेरी ऊपर तक पहुंच है| meri upar tak pahunch hai
November 19, 2022
व्यंग्य कविता-मेरी ऊपर तक पहुंच है अच्छों अच्छों को अपने झांसे में लाता हूं जो सियानें बनते हैं उनको ठगियाता

