गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा
गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा तिरंगा है हमारी जान, कहलाता देश की शान। तीन रंगों से बना तिरंगा, बढ़ता हम …
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गुणगान ( गुरु)- तेज देवांगन
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गुणगान( गुरु) कितना करूं गुणगान इनका,मेरे अल्फाज कम पड़ जाएंगे,अगर पीरों भी लूं इन्हे तारो में,मेरे साज कम पड़ जाएंगे.कितना
अकेला!-डॉ. माध्वी बोरसे
January 7, 2022
अकेला! दुख में हमेशा इंसान अकेला होता है, सुख में दुनिया उसके साथ होती है! उत्साह के लिए इंसान हमेशा
पधारो म्हारो राजस्थान-डॉ. माध्वी बोरसे!
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पधारो म्हारो राजस्थान! जीवंत संस्कृति, रेतीली मरुस्थलीय भूमि, ऊंट पर बैठकर सवारी, जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है
मसूरी-जन्नत सा शहर-डॉ. माध्वी बोरसे!
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चाह-तेज देवांगन
January 7, 2022
शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार
हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल
January 6, 2022
हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

