गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा
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Kavita-पति को भी इंसान मानो
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राष्ट्रभाषा या राजभाषा | rashtrabhasha ya rajbhasha
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राष्ट्रभाषा या राजभाषा अपने ही देश में दिवस मनवाने की मोहताज़ हूँ,विवश हूँ मैं..राष्ट्रभाषा हूँ या राजभाषा हूँ,आज भी इस
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तुम ही मेरा सब कुछ-दिकु सुनो दिकु…… एक आसएक विश्वासतुम से है सिर्फ एक मिलन की प्यास चाहूं सिर्फ ख्वाब
शहीदों की कुर्बानी | shaheedon par kavita
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