Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

गणतंत्र दिवस-डॉ. माध्वी बोरसे!

गणतंत्र दिवस! 26 जनवरी 1950 में भारतीय संविधान लागू किया,भारत को पूर्ण रूप से गणतंत्र घोषित कर दिया! परेड, भाषण, …


गणतंत्र दिवस!

गणतंत्र दिवस-डॉ. माध्वी बोरसे!
26 जनवरी 1950 में भारतीय संविधान लागू किया,
भारत को पूर्ण रूप से गणतंत्र घोषित कर दिया!

परेड, भाषण, विद्यालय में मिठाइयां, 26 जनवरी का दिन राष्ट्रीय पर्व ,
सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि के साथ मनाते हुए होता है गर्व!

पहली बार गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया,
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ तिरंगा फहराया!

इस मुख्य दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि करते हैं अर्पित ,
सलामी देते हैं उनको, जिनका जीवन है देश के लिए समर्पित!

भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के लाल किले पर भारतीय ध्वज फहराया जाता,
देश की राजधानी दिल्ली मे बड़ी ही धूम धाम से अस्त्र शस्त्र का प्रदर्शन होता!

सामूहिक रूप में खड़े होकर हम सब राष्ट्रगान गाते ,
देशभक्त बनकर अपने देश की उन्नति के लिए काम करने की कसम खाते!

जिनकी शहादत से देश हुआ गणतंत्र,
झुक कर करते हैं उन वीरों के चरणों में नमन,
चलो हम सब भी, हमारे देश की जिम्मेदारी, पूर्ण हृदय से निभाए,
जय हिंद, वंदे मातरम का मिलके नारा लगाए!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

Han mai badal rha hu by Rahul Aligadhi

September 24, 2021

 *हाँ, मैं बदल रहा हूँ …*  जी भर के जीना सीख रहा हूँ, आईने में खुद को ढूंढ रहा हूँ।

Dekha hai maine by komal Mishra`koyal

September 23, 2021

  देखा है मैंने देखा है मैंने घरों में,कैद होती आवाजें, गुम होती खुशियाँ,उदास होते चेहरे।  पीले पड़ते होंठ, दम

Toot pada Aakash by vijay Lakshmi Pandey

September 23, 2021

 टूट  पड़ा आकाश …!!! बीती  रात सहसा टूट   पड़ा  आकाश । आलय  देवालय  सब एकाकार । अनवरत गर्जना  दामिनी  दमक

Thekedaro ka vikash by Jitendra Kabir

September 23, 2021

 ठेकेदारों का विकास छोटा ठेकेदार पंचायत स्तर पर करता है प्रचार और समर्थन ‘दल विशेष’ का, बदले में पाता है

Talash zindagi ki by komal Mishra koyal

September 23, 2021

 तलाश ज़िंदगी की क्या कुसूर मेरा था,  बस अपने घर को छोड़ा था।  पूरे हो सके ख़्वाब इन आँखों के, 

Bhul jane ki takat rakhte hai by vijay Lakshmi Pandey

September 23, 2021

 भूल जानें की ताक़त रखते हैं …!! हर लम्हा गुज़रता है मेरा , दर्द     के   आग़ोश   में । जख़्म 

Leave a Comment