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गजल

 गजल मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” म्हारे वतन मे अमन-चैन बण्यो रैवै । आ प्रार्थना जणो-जणो करतो रैवै ।। घर – घर …


 गजल

मईनुदीन कोहरी"नाचीज बीकानेरी"
मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

म्हारे वतन मे अमन-चैन बण्यो रैवै ।

आ प्रार्थना जणो-जणो करतो रैवै ।।

घर – घर ,गांव-सहर संदेसो पोंचावां ।

अमीर-गरीब रै बीच भेद मिटतो रैवै ।।

अबै नेतावां सूं तो उबकारयां आवै ।

भ्रष्ट-तंत्र निजोगां सूं लारो छूटतो रैवै।।

खुशहाली लावण सारु अलख जगावां।

हरेक नै रोटी – कपड़ो – घर मिलतो रैवै ।।

टाबर पढै हर हाथ नै काम-धंधा मिलै ।

बेटयां नै राज रो सरंक्षण मिलतो रैवै ।।

“नाचीज” देस तो अबै राम भरोसे चालै ।

अबै तूं दिल- दिमाग सूं क्यूं सोचतो रैवै ।।

मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

मो-9680868028


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