Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Chanda_rawat, poem

गगन की बुलन्दीयो को छुना- चन्दानीता रावत

गगन की बुलंदियों को छूना हैं  उड़ना है हमे उड़ना हैगंगन की बुलंदियों को छूना हैआँखो के हसीन ख्वाब कोवास्तविकता कर जीना …


गगन की बुलंदियों को छूना हैं 

गंगन की बुलन्दीयो को छुना-   चन्दानीता रावत

उड़ना है हमे उड़ना है
गंगन की बुलंदियों को छूना है
आँखो के हसीन ख्वाब को
वास्तविकता कर जीना है

उमंगों से भरे ह्रदय से
फल प्राप्त कर दिखाना है
निश्चय है संकल्प हमारा
अटुट है विश्वास से

जिन्दगी की चुनौतियो को
पार कर जाना है
जिन्दगी के हर मोड़ पर
सतरंगी रुप दिखाना है

उड़ना है हमे उड़ना है
गंगन की बुलंदियों को छूना है

चन्दानीता रावत
औरंगाबाद वाराणसी


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment