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Chanda_rawat, poem

गगन की बुलन्दीयो को छुना- चन्दानीता रावत

गगन की बुलंदियों को छूना हैं  उड़ना है हमे उड़ना हैगंगन की बुलंदियों को छूना हैआँखो के हसीन ख्वाब कोवास्तविकता कर जीना …


गगन की बुलंदियों को छूना हैं 

गंगन की बुलन्दीयो को छुना-   चन्दानीता रावत

उड़ना है हमे उड़ना है
गंगन की बुलंदियों को छूना है
आँखो के हसीन ख्वाब को
वास्तविकता कर जीना है

उमंगों से भरे ह्रदय से
फल प्राप्त कर दिखाना है
निश्चय है संकल्प हमारा
अटुट है विश्वास से

जिन्दगी की चुनौतियो को
पार कर जाना है
जिन्दगी के हर मोड़ पर
सतरंगी रुप दिखाना है

उड़ना है हमे उड़ना है
गंगन की बुलंदियों को छूना है

चन्दानीता रावत
औरंगाबाद वाराणसी


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