Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

ख्वाहिशें- आकांक्षा त्रिपाठी

ख्वाहिशें मन को हसीन करने वाली ये ख्वाहिशें, जिंदगी के समंदर में गोता लगाती येमशरूफ ख्वाहिशें। चाहत,इच्छा,मन के भाव के …


ख्वाहिशें

ख्वाहिशें- आकांक्षा त्रिपाठी
मन को हसीन करने वाली ये ख्वाहिशें,

जिंदगी के समंदर में गोता लगाती ये
मशरूफ ख्वाहिशें।

चाहत,इच्छा,मन के भाव के इर्द गिर्द,
गोल गोल चक्कर लगाती ये ख्वाहिशें।
अनगिनत भावों को जाल में फसाती हैं ख्वाहिशें।

मैं हूं कहां, और जाना कहां हैं
रास्ते को करीब से रूबरू कराती हैं ख्वाहिशें।

ख्वाहिशों की उपज बड़ी आसान है जिंदगी में,
मंजिल के रास्ते आसान करती हैं ख्वाहिशें।

ख्वाहिशों का पैमाना समय पे निर्भर है,
वक्त बदलते ही बदल जाती हैं ख्वाहिशें।

ख्वाहिशें मांगती हैं किस्मत और मोहलत,
किसी को खुशी किसी को बेरुखी देती हैं ख्वाहिशें।
मन की चंचलता का परिणाम है ये ख्वाहिशें
कभी मिलती कभी छूटती,
वास्तविकता से परे जीवन का आयाम है ख्वाहिशें।

जीवन के पहलुओं का चक्र दर्शाती,
अद्भुत, बेमिसाल सदाबहार बागवान है ख्वाहिशें।।

आकांक्षा त्रिपाठी


Related Posts

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा

मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-

January 25, 2022

मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने

गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी

राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

राजनीति के सियार पैसा किसी के हथियार है,लालच किसी का हथियार है,इसी सनातन मोह कोसत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनातेआजकल

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

श्रेष्ठता के मानक यह गवारा नहीं समाज कोकि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन औरमेहनत के आधार पर कोई इंसानसमाज में उच्चतम

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के

Leave a Comment