Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Priyanka_saurabh

खेलों के पीछे शर्मनाक खेल

खेलों के पीछे शर्मनाक खेल देश के जो खिलाड़ी विदेशी सरजमीं पर तिरंगे का मान बढ़ाते आए हैं. उन्हें अपने …


खेलों के पीछे शर्मनाक खेल

खेलों के पीछे शर्मनाक खेल

देश के जो खिलाड़ी विदेशी सरजमीं पर तिरंगे का मान बढ़ाते आए हैं. उन्हें अपने अधिकारों के लिए जंतर मंतर पर धरना देना पड़ रहा है. क्या ऐसे देश खेलों में आगे बढ़ेगा जहां लगातार खेल दुनिया में यौन उत्पीड़न के विवाद बढ़ते जा रहे हैं. देश को मेडल दिलाने वाले इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं. बात हो रही पहलवानों की जो कुश्ती महासंघ से दो-दो हाथ करने उतरे हैं. तो आखिर इस लड़ाई का अंजाम क्या होगा?
– प्रियंका सौरभ

किसकी सरकार है या किसकी थी, ये मुद्दा नहीं है. सवाल ये है कि महिला प्लेयर के साथ हर फेडरेशन क्रिकेट से लेकर कुश्ती तक, यौन शोषण होता है. मुद्दा महिला खिलाड़ियों की सम्मान एवं मानसिक, शारीरिक सुरक्षा का है. साथ ही फेडरेशन को खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित जगह बनाने का है.अगर बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो महिला खिलाड़ियों में खेल के प्रति रुझान खत्म हो जायेगा. उनका मनोबल गिर जायेगा. महिलाओं की खेलों में भागीदारी कम हो जायेगी. देश की प्रतिष्ठा और महिला खिलाड़ियों की अस्मिता का सवाल है. क्यों राजनीति में दम तोड जाती है प्रतिभाएं, खेलों में राजनीति के सक्रिय होने से प्रतिभावान खिलाड़ियों को दबाया जाता है, खिलाड़ी हमेशा खेल अधिकारियों के दवाब में रहते है. खेलों में मेहनत करने वालों की प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं आवाज़ उठाने पर ख़त्म कर दिया जाता है.
सर्वोच्च खेलों में पदक विजताओं द्वारा बोर्ड पर ऐसे आरोप और धरने के बाद जांच का आश्वासन देना बोर्ड और सरकार दोनों का चरित्र स्पष्ट कर रहा है. जो बोर्ड है वहीं सरकार है इसलिए सरकार क्या बोर्ड अध्यक्ष को हटाएगी क्या निष्पक्ष जांच होगी. डब्ल्यूएफआई का अध्यक्ष एक सांसद है और भारत के लगभग सभी खेल बोर्डों के अध्यक्ष राजनीतिक व्यक्ति है इसलिए खेलों में विशेष प्रगति और विकास के लिए अध्यक्ष का पूर्व खिलाडी होने की मांग भी जोर पकड़ रही है. वैसे भी ऐसे संघों-संस्थाओं पर राजनेता नहीं, खेल प्रतिभाओं को विराजमान करना चाहिए. इन संस्थाओं में पदाधिकारियों का कार्यकाल भी निश्चित होना चाहिए एवं एक टर्म से ज्यादा किसी को भी पद-भार नहीं दिया जाना चाहिए. भारत के लिये कुश्ती ही एक ऐसा खेल है, जो चाहे ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल खेल, सबसे अधिक पदक ले आता है. खिलाड़ियों की फंडेशन नेताओं की नहीं खिलाड़ियों की ही बननी चाहिए. इसमें सीनियर खिलाड़ी होने चाहिए ना कि नेता यह हमारे देश के वह खिलाड़ी है जिन्होंने हमारे भारत देश का नाम चमकाया है. गोल्ड मेडल लेकर आए हैं.
इस खेल ने दुनिया में भारतीय खेलों का परचम फहराया है, भारत के खेलों को एक जीवंतता एवं उसकी अस्मिता को एक ऊंचाई दी है. इसके खिलाड़ी अपने जुनून के बल पर विजयी होते रहे हैं. इस तरह दुनिया भर में भारतीय पहलवानों ने देश का खेल ध्वज एवं गौरव को ऊंचा किया है तो ऐसे में अगर कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और प्रशिक्षकों पर महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण का आरोप लग रहा है, तो इससे दुनिया भर में भारत की बदनामी हो रही है. यह एक बदनुमा दाग है, एक बड़ी त्रासद स्थिति है. शर्म का विषय है. धरने पर बैठे यही खिलाड़ी जब पदक जीतकर आते है तब खुद राजनीतिज्ञ इन्हे बुलाकर सबके माइक सेट कर करके मीडिया प्रोपगेंडे के लिए सबकी बड़ी सराहना करते है लेकिन जब ये खिलाड़ी खुद के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ धरने पर बैठते है. उस समय बड़ी तत्परता दिखाने वाले राजनीतिज्ञों को सांप सूंघ जाता है ऐसा क्यों?
भारत में खेलों एवं खिलाड़ियों की उपेक्षा का लम्बा इतिहास है. खेल संघों की कार्यशैली, चयन में पक्षपात और खिलाड़ियों को समुचित सुविधाएं नहीं मिलने के आरोप तो पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन ताजा मामला ऐसा है जिसने कुश्ती महासंघ ही नहीं, बल्कि तमाम खेल संघों की विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. लड़कियों एवं देश के युवा खिलाड़ियों के साथ गलत व्यवहार करने वाले सांसद को तत्काल उनके पद से हटाकर उनसे इस्तीफा लिया जाए और उसके बाद निष्पक्ष जांच एवं कानूनी कार्यवाही की जाए. जिससे देश के युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास एवं मनोबल देश के ऊपर बना रहे और विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन हो ऐसे जिन्होंने हरकत करने वाले सांसद विधायक मंत्री या अधिकारी कोई भी हो तत्काल उसे उसके पद से हटाकर उस से इस्तीफा ले लिया जाए.
यही देश के युवाओं के लिए सही कार्य होगा. इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि सरकार की बंदिशों के बावजूद अधिकांश खेल संघों पर राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों का ही कब्जा है. इनमें बड़ा भ्रष्टाचार व्याप्त है, जो वास्तविक खेल प्रतिभाओं को आगे नहीं आने देती. इन पदाधिकारियों की चिंता खेलों के विकास से अधिक अपने विकास की रहती है. इनका अधिकांश समय भी कुर्सी पर बैठे राजनेताओं को खुश करने एवं खेल संघों की राजनीतिक जोड़-तोड़ में ही व्यतीत होता है. खिलाड़ियों से अधिक तो ये पदाधिकारी सुविधाओं का भोग करते हैं, विदेश की यात्राएं करते हैं. पीड़ित खिलाडियों को भी यदि पक्के सबूत है तो उन सबूत को देश और देश के न्यायालय के सामने रखने चाहिए.
जो भी है आरोप बेहद गंभीर है, निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और आरोप सिद्ध होता है तो कड़ी सजा मिलनी चाहिए, देश के सभी बोर्डों की कार्यकारिणी भंग कर ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए कि खेल बोर्डों में अराजनीतिक और खेल बैकग्राउंड लोग ही चुने जाए. सबसे ज्यादा चिंताजनक बात है कि अगर देश का गर्व एवं गौरव बढ़ाने वाली महिला पहलवानों को अगर अपने सम्मान की रक्षा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है, तो हमारे खेल संघों की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ जाती है. जहां देश के खिलाड़ियों के मन में अपने संघों-खेल संस्थाओं के लिये गर्व एवं सम्मान का भाव होना चाहिए, जबकि उनमें तिरस्कार एवं विद्रोह का भाव है तो यह लज्जा की बात है. साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि समय-समय पर खेल जगत से ऐसे आरोप क्यों लगते रहते हैं. क्यों महिला खिलाड़ी यौन शोषण का शिकार होकर भी चुप रहती है कि कहीं उनका कैरियर खत्म न कर दिया जाये. भविष्य में ऐसा न हो और देश की बेटियां सुरक्षित महसूस करते हुए खेल में कैरियर बनाएं, यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न फेडरेशनों के अंदर कारगर तंत्र बनाने पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए.
-प्रियंका सौरभ

About author 

प्रियंका सौरभ रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

प्रियंका सौरभ
रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार
facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/
twitter- https://twitter.com/pari_saurabh


Related Posts

जलकुक्ड़ा – ज़लनखोरी| jalkukda-jalankhori

November 25, 2022

जलकुक्ड़ा – ज़लनखोरी दूसरों के साथ जलनखोरी या इर्ष्या रखने वाले जीवन में कभी सफलता प्राप्त नहीं करते ईर्ष्या में

वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत औद्योगिक नीति की जरूरत।Strong industrial policy needed to meet the current challenges.

November 25, 2022

वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत औद्योगिक नीति की जरूरत। देश का सन्तुलित विकास करने कि लिए संसाधनों को

अपनों से बेईमानी, पतन की निशानी| Apni se beimani, patan ki nishani

November 25, 2022

अपनों से बेईमानी, पतन की निशानी। हम दूसरों की आर्थिक स्थिति पर ज्यादा ध्यान देते हैं। अपनी स्थिति से असंतुष्टि

बड़े बने ये साहित्यकार

November 21, 2022

बड़े बने ये साहित्यकार बंटते बंदर बांट पुरस्कार ।दौड़ रहे है पीछे-पीछे,बड़े बने ये साहित्यकार ।। पुरस्कारों की दौड़ में

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस | Zero tolerance on terrorism

November 21, 2022

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस आतंकवाद को समाप्त करने उन्हें राजनैतिक विचारधारात्मक और वित्तीय सहायता देना बंद करना जरूरी वैश्विक स्तर

आओ मन को सकारात्मक सोच में ढालें| Let’s mold the mind into positive thinking

November 21, 2022

तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा आओ मन को सकारात्मक सोच में ढालें वर्तमान आधुनिक प्रौद्योगिकी डिजिटल युग में अंधविश्वासों गलतफहमियां से

Leave a Comment