खुशनुमा वातावरण बनाएं!
डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)
खुशनुमा वातावरण बनाएं! डॉ. माध्वी बोरसे! लाए खुशियों की बहार, चाहे परेशानियां हो हजार, जिंदगी तो है कुछ पलों की, …
डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)
September 30, 2021
प्रार्थना न दे दर्द इतना कि सह न सकूं मैं मेरे दाता संभालना तो तुझ ही को हैं झमेले मेरे
September 30, 2021
मुश्किल डगर है एक तो सच्चाई के पथ पर चलना दुश्वार होता है ऊपर से बुराई का आकर्षण भी दुर्निवार
September 30, 2021
हर दुष्कर्म के बाद भूल जायेंगे लोग इन बर्बर घटनाओं को, जो नहीं भुला पाएंगे वो बहला लेंगे खुद को
September 30, 2021
उम्र भर रोटियाँ सेंकी…!!! उम्र भर रोटियाँ सेंकी हमनें , हाथ जले तो असावधानी हमारी है। लॉट के लॉट बर्तन
September 30, 2021
इंसान त्याग सकता है जब देखता हूं मैं किसी स्वर्ण को अपने दलित ‘बॉस’ या फिर दलित सहयोगी के साथ
September 30, 2021
शिप्रा के किनारे महाकाल के प्रांगण में जब , हम दोनों चलकर आए थे , दर्शन पूजन कर शिव का