खुशनुमा वातावरण बनाएं!
डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)
खुशनुमा वातावरण बनाएं! डॉ. माध्वी बोरसे! लाए खुशियों की बहार, चाहे परेशानियां हो हजार, जिंदगी तो है कुछ पलों की, …
डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)
November 10, 2021
चांद मेरा आज तुम चाहे मत निकलो चांद परवा नहीं चमकेगा टुकड़ा मेरे दिल का तुम जलाना नहीं निकला हैं
November 10, 2021
कैसे पूरी हों उम्मीदें हमारी? हमारे देश की जनता चुनावों के समय नहीं देखती कि… उम्मीदवार पढ़ा लिखा है या
November 9, 2021
नवजीवन की कीमत विनाश! से डरना स्वाभाविक है किसी भी जीव के लिए, मगर यह सिर्फ एक माध्यम है प्रकृति
November 9, 2021
उड़ी रे पतंग* उड़ी उड़ी रे पतंग मेरी उड़ी रे। लेके भावनाओं के साथ उड़ी रे। भर के उमंगो संग
November 7, 2021
कौन तय करके आया था? ब्राह्मण के घर लेना था जन्म या फिर क्षत्रिय, वैश्य अथवा शूद्र के यहां, कौन
November 7, 2021
कवितासुशासन को आखिरी छोर तक ले जाना हैं सरकारों को ऐसी नीतियां बनाना हैं सुशासन को आखरी छोर तक ले