Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

खास-डॉ. माध्वी बोरसे!

खास! जब तक तुझ में सांस है,सफलता की आस है,खुशनुमा सा एहसास है,पूरा जोश और साहस है,मानो तो कुछ भी …


खास!

खास-डॉ. माध्वी बोरसे!
जब तक तुझ में सांस है,
सफलता की आस है,
खुशनुमा सा एहसास है,
पूरा जोश और साहस है,
मानो तो कुछ भी नहीं,
मान लो तो बहुत कुछ खास है!

कभी जन्नत तो कभी वनवास है,
खुशियों का आगाज है,
मंजिल तेरे पास है,
दहाड़ की आवाज है,
मानो तो कुछ भी नहीं,
मान लो बहुत कुछ खास है!

किस बात का एतराज है,
क्यों खुद से तू नाराज है,
दो वक्त का अनाज है,
किसकी तुझे तलाश है,
मानो तो कुछ भी नहीं,
मान लो तो बहुत कुछ खास है!

ऊपर श्वेत आकाश है,
नीचे सुंदर कैलाश है,
तेरा अलग अंदाज हे,
हर मुमकिन प्रयास है,
मानो तो कुछ भी नहीं,
मान लो तो बहुत कुछ खास है!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सशक्त मां, सशक्त विश्व!

May 8, 2022

सशक्त मां, सशक्त विश्व! अत्यंत बुरे अनुभवों में से एक जो एक बच्चा देख सकता है, वह परिवार या समाज

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

PreviousNext

Leave a Comment