Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा …


 खालसा

खालसा-हरविंदर सिंह ''ग़ुलाम'''

अंतर्मन में नाद उठा है 

कैसा ये विस्माद उठा है 

हिरण्य कश्यप के घर देखो 

हरी भक्त प्रह्लाद उठा है 

जब जब हुआ अहम् में अँधा 

कोई नृप दुनियाँ ने देखा है 

किया धर्म पर दूषण भरी 

फिर मन में अवसाद उठा है 

जब जब भरी सभा में कोई 

चीर हरण का यत्न करेगा 

फिर निर्बल की रक्षा हेतु 

कृष्ण चक्र बिन अपवाद उठा है

सदियों से देखा है हमने 

क्यों मानस ने मानस को मारा 

वसुधैव कुटुंब करने हेतु 

कर खालसा पंथ सिंहनाद उठा है

हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’ 


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment