Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना-जयश्री बिर्मी

 खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना किसान कानून की वापसी कही गढ़ आला पन सिंह गेला न बन …


 खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना

खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना-जयश्री बिर्मी

किसान कानून की वापसी कही गढ़ आला पन सिंह गेला न बन जाएं।

शिवाजी के बहादुर सैनिक थे तानाजी जिनको कौंधना का किल्ला को औरंगजेब ने सर कर लिया था उसे वापिस प्राप्त करने के लिए शिवाजी महाराज ने भेजा था। कौंधना गढ़ का किला मजबूत होने के साथ साथ बहुत ऊंचा भी था लगभग ७०० मीटर के करीब।तनाजी को इसे सर करने का कार्य छत्रपति शिवाजी ने दिया था।आदेश पा कर तनाज़ी अपने सैनिकों के साथ किल्ले के नीचे इक्कठे हो गए लेकिन ऊंचे किल्ले और सीधी चढ़ाई वाली दीवारों पर चढ़ पाना मुश्किल था।कुछ चार पांच साथियों के साथ तानाजी ने मुश्किल चढ़ाई चढ़ तो गए किंतु सैनिकों को भी उपर लाना था तो उन्हों ने पेड़ पर  रस्सा बांधके  नीचे फेंक और सबको सैनिकों को किल्ले पर चढ़ाया। और उदयसिंह को हरा कर किल्ला सर तो कर लिया लेकिन उनकी जान चली गई ,उदयसिन्ह को मार कर खुद भी शहीद हो गए और उन्ही के नाम से कोंधा के किल्ले को सिंह गढ़ नाम दिया गया।शिवाजी महाराज ने एक किल्ला जीत  ने के लिए अपना दायां हाथ खो दिया था जिसका उनको बहुत अफसोस था।

 अब अभी के परिपेक्ष्य में देखें तो किसान कानून वापस ले एक जीत पाने के लिए क्या भविष्य में दूसरे  कानूनों को वापस लेने के लिए रास्ता तो नहीं बन गया हैं? अगर ये आंदोलन किसानों का ही हैं, किसी और प्रयोजन के साथ नहीं हैं तो खत्म हो जाना चाहिए।लेकिन अगर मकसद कुछ और हुआ तो आगे जाके परिस्थितियों का विकट होना संभावित हो जायेगा।अगर ऐसे ही कानून वापसी की रीत बन गई तो देश में कोई भी कानून हटाने के लिए दिल्ली को जाम कर लो और कानून को हटाओं वाला एक फंडा बन जायेगा।अगर इन्हें कोई बाहरी सपोर्ट भी हुआ तो उन्हे भी शह मिल जायेगी।अगर नॉट बंधी के बाद यूपी में जीते तो कानून हटा कर भी जीता जायेगा ये कुछ जम नहीं रहा हैं।

 खूब अच्छा दिन चुना गया हैं इस कार्य के लिए।गुरुपर्व के शुभ दिन यह समाचार उत्साह वर्धक तो हैं ही लेकिन उसके प्रतिघात क्या क्या होंगे ये कहना मुश्किल हैं।देश में जो इस कानून के समर्थन में थे वो लोग अब इसके हट ने से होने वाले आर्थिक नुकसान के बारे में गिनती करना शुरू कर चुके हैं और देश को होनेवाले आर्थिक नुकसान की वजह से आर्थिक विकास के पर को प्रतिघात होने वाले हैं उससे भी चिंतित हैं।एक छोटी उपलब्धि के लिए भविष्य के कानूनों के लिए इसी प्रकार के विरोध होने की राहें तैयार हो गई हो ऐसा लग रहा हैं।किसान हमारे अन्नदाता हैं उन्हे सभी सहुलते कानूनन मिलनी चाहिए ये एक दम सही बात हैं लेकिन बड़े बड़े नेता जिनकी करोड़ों की जमीनें हैं वह लोग अपने फायदे के लिए उनका गैरउपयोग  करे ये गलत हैं।किसान संगठन में भी दो प्रकार के होने चाहिए,एक तो बड़े वाले किसान और दूसरा छोटे किसान जिससे दोनों संगठनों को अलग अलग पहचान मिले। उन दोनों के उत्पाद और ज़मीन की साइज के हिसाब से ही उनके लाभ और जरूरतों के परिमाण तय हो सके।उनकी जरूरतें भी अलग से होगी और उनको जो सहाय दी जाएं वह सिर्फ उनको ही मिले।छोटे किसान आर्थिक रूप से भी कमजोर होने की वजह से उन्हें बड़े किसानों से सहाय की ज्यादा जरूरत हैं।बड़े किसानों की आर्थिक स्थिति ज्यादा बेहतर होने की वजह से समृद्ध हैं और सहायता की कम जरूरत होगी।लेकिन जो मांगे किसानों की हैं उसमे ज्यादा फायदें किसको मिल रहें हैं ये भी एक प्रश्न हैं।अभी भी आंदोलन आंदोलित ही रहा तो कब पूरा होगा? अपने राजकीय फायदों के लिए विभिन्न राजकीय पक्ष भी उनको मदद और आर्थिक सहाय भी करते हैं।एक वर्ष से ज्यादा समय से चल रहा ये आंदोलन की वजह से देश और राजधानी को काफी आर्थिक नुकसान हुआ हैं ,लेकिन अब भी ये आंदोलन खत्म नहीं हो रहा हैं तो आगे आर्थिक और सामाजिक नुकसान होने पूरी शक्याता हैं।अगर आंदोलन में लोगों ने जन गवाई हैं तो उनमें कोई नेता का नाम क्यों नहीं हैं,क्यों सिर्फ गरीब किसान ही मारें गए हैं? ये कोई क्यों नहीं पूछ रहा।आंदोलन के दरम्यान सभी एक से टेंट और एक से वातावरण में रह रहे होने के बावजूद क्यों गरीब किसान ही मारें ? इतने सारे प्रश्नों को छोड़ सब उनके साथ हमदर्दी ही जता रहें हैं।

इस राजकीय चौसर में कितने पांडू दांव पर लगे और कितनी द्रौपदियां बेइज्जत हुई इसका तो पता नहीं किंतु कौरव बने किसानों को इन सब से फायदे से ज्यादा नुकसान ही हो रहा हैं।सरकार ने भी कानून हटा कर अपनी राजकीय माइल्स सर किए हैं तो उसका नुकसान भी समय के साथ देखने को मिलेगा ही। 

 जयश्री बिर्मी 
अहमदाबाद 

 


Related Posts

कविता–कृष्ण की व्यथा| krishna ki vyatha

January 9, 2023

कविता–कृष्ण की व्यथा क्या कृष्ण की कोई व्यथा नहीं थी? उनकी पीड़ा की कोई गाथा नहीं थी? छोड़ा गोकुल मैया

कविता – ‘रूह’ | kavita rooh

January 9, 2023

कविता – ‘रूह’ मैं अजर हूँ मैं अमर, जीवन मृत्यु से हूँ परे।रहती हूँ प्राणी के तन में मैं,दिए में

Ayurved par kavita | आयुर्वेद पर कविता

January 8, 2023

आयुर्वेद और मधुकवि हर दिन हर घर आयुर्वेद।। दूर करे तन मन के खेद।। नस नाड़ी को पुष्ट बनाता।। त्रिविध

Kashmir par kavita | कश्मीर पर कविता

January 8, 2023

अपना कश्मीर और मधुकवि अब तो सोए हुए भारती जाग जा|| देखले अपने भारत की क्या है दशा|| आज हिन्सा

व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं

January 8, 2023

 व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं  गंभीर

नए साल में नई शुरुआत!

January 6, 2023

नए साल में नई शुरुआत! नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,नए-नए से

PreviousNext

Leave a Comment