Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

खान-पान पर भी तकरार

 खान-पान पर भी तकरार जितेन्द्र ‘कबीर’ एक घर की चार संतानें… खान-पान में चारों के हैं अलग विचार, शाकाहारी है …


 खान-पान पर भी तकरार

जितेन्द्र 'कबीर'
जितेन्द्र ‘कबीर’

एक घर की चार संतानें…

खान-पान में

चारों के हैं अलग विचार,

शाकाहारी है कोई

किसी को पसंद आता है

मांसाहार,

अपनी पसंद को श्रेष्ठ

बताते हुए

अगर इसी बात के लिए

करने लगें वो चारों अक्सर

तकरार

तो बताओ कैसे अखंड रहेगा

वो परिवार?

अपने देश का भी है

यही हाल,

सदियों से जो लोगों का 

खान-पान

उसको लेकर आज

क्यों खराब करें

हम आपसी व्यवहार?

खाने को धर्म से जोड़ना

है सिर्फ राजनीतिज्ञों के लिए

फायदे का कारोबार,

दो जून रोटी जुटाने की खातिर

तरसने वाली जनता के लिए तो 

यह है भूखे मरने का आधार,

सोचो जरा!

बकरे की जान तो दोनों सूरत

जानी ही है

काट दो उसे झटके से

या करो धीरे-धीरे हलाल,

दुनिया की अधिकतर आबादी

मांस पर है निर्भर खाने के लिए,

शाकाहार के हिमायती

इस बात का भी रखें ध्यान,

खान-पान में भी 

राजनीति घुसेड़ने वाले नेता

समझते नहीं इतनी सी बात

कि पेट भर खाना है

हर जीव का नैसर्गिक अधिकार,

वैश्विक स्तर पर 

भुखमरी के इंडेक्स में

फिसलता जा रहा है

हमारा देश लगातार

और एक हम हैं

जो भूखे लोगों का पेट

भरने के बजाय

कर रहे हैं अपने खान-पान की

श्रेष्ठता पर अहंकार।

                       जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र- 7018558314


Related Posts

हार क्यों मान ली जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

हार क्यों मान ली जाए? बुरे से बुरा क्या हो सकता हैहमारे साथ?यही कि हमारी धन – संपत्तिहमारे हाथ से

सफेद आसमां- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सफेद आसमां कड़ाके की सर्दी मेंरजाई का मोह छोड़ पाओ अगरतो निकलो बाहर जराआंगन चौबारे तक, देखो ऊपर!आसमान बरसा रहा

खट्टी मीठी यादें – डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

खट्टी मीठी यादें आती है मानस पटल परउभरकर वो सुनहरी यादें प्रेम रस में भीगा -भींगामधुरमय स्नेहिल सौगातें जिनकी यादें

नव वर्ष – डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

नव वर्ष नववर्ष तो नववर्ष हैअंग्रेजी हो या हिन्दी मधुमय हो जीवन येनई उल्लास के साथ स्फुरण हो विलक्षण ऐतिहसिक

पैगाम – डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

पैगाम ह्रदय को न बंजर होने देनालगाओ प्रेम के पौधे भी स्नेह से सींच -सींच करकेउगाओ प्रेम वाटिका भी मिली

अजीज मेरे- डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

अजीज मेरे अलविदा ना कहना मुझेदिसम्बर की तरह मुझेआती है जनवरी आयेखुशियाँ भी ढेरों लाएं महकती रहे बगिया तेरीचहकती रहे

Leave a Comment