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क्रोध, कायरता की निशानी!

क्रोध, कायरता की निशानी! क्रोध एक श्राप है,इसमें पतन का वास है,क्रोध पर हो पूर्ण रूप से वश,शीतलता और प्रेम …


क्रोध, कायरता की निशानी!

क्रोध, कायरता की निशानी!

क्रोध एक श्राप है,
इसमें पतन का वास है,
क्रोध पर हो पूर्ण रूप से वश,
शीतलता और प्रेम को भर दो मन में,
शांति से बिताए हर एक दिवस!

क्रोध स्वयं को जलाता,
मूर्खता का प्रमाण कहलाता,
ज्ञान को समाप्त कर देता,
जिसने इसे वश में कर लिया,
वही कहलाए असली विजेता!

यह मनुष्य को शक्तिविहीन करता,
डर की वजह से मनुष्य अक्सर लड़ता,
क्रोध है, मूर्खता की निशानी,
प्रेम से ही हर जीत हासिल हो जाए,
इस बात को समझे, व्यक्ति बुद्धिमानी!

क्रोध है एक प्रकार का क्षणिक पागलपन,
इसके करने से हो जाता है चिंतित मन,
चलिए आज से, इस जहर को अपने मन से निकाले,
इस बड़ी सी दुनिया में,
कम से कम खुद को तो संभाले!

करे क्रोध पर नियंत्रण,
चाहे कुछ भी हो जाए उस क्षण,
ले ले आज से यह एक प्रण,
क्रोध की अग्नि में और ना जले,
दृढ़ता से लेते हैं यह वचन!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


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