Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

क्यूँ हम अच्छे नहीं बन सकते

“क्यूँ हम अच्छे नहीं बन सकते”  भावना ठाकर ‘भावु’  मानव में मनुष्यता के गुण विलुप्त होते जा रहे है, वहशीपन …


“क्यूँ हम अच्छे नहीं बन सकते” 

भावना ठाकर 'भावु'
भावना ठाकर ‘भावु’ 
मानव में मनुष्यता के गुण विलुप्त होते जा रहे है, वहशीपन के दौरे पड़ रहे है, सद्विचारों ने साथ छोड़ दिया है और दरिंदगी दीमक बनकर पनप रही है। कितने अवगुणों से अवगत कराएं खुद ही गिन लीजिए क्या एक भी इल्ज़ाम गलत है? क्यूँ हम प्यार करना भूल गए है, क्यूँ हम रिश्ते निभाना भूल गए है, क्यूँ हम गिरगिट बनते जा रहे हैं, क्यूँ हम ज़हरीले साँपों की जगह ले रहे है”

हम अच्छे क्यूँ नहीं बन सकते? क्यूँ हम बुराई के दलदल में घंसे जा रहे है? कितने सारे सवाल उठ खड़े हुए है मनुष्यता पर। 

उपर वाले ने मनुष्य अवतार देकर हमें नवाज़ा है तो क्यूँ न मानवता की मिसाल बनें। बचपन की तरह ताउम्र मासूम नि:स्वार्थ और निश्चल क्यूँ नहीं बने रहते? क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाना है। जिंदगी में कांटे से कंटीले न बनें फूलों की तरह सुंदर और खुश्बूदार बनें, सभी का शुक्रगुजार बनें, किसीकी बुराई पर बुरे न बनें, अपने स्वभाव को त्यागकर गलत न अपनाएं क्यूँ हम इतना नहीं कर सकते? उन सभी के शुक्रगुजार बनें जिनकी वजह से जिंदगी में आपको कुछ मिला हो, जिनकी वजह से आप कुछ बनें हो। परिवार के लिए प्यारा साथी और देश के लिए एक अच्छा नागरिक बनें। अच्छाईयां सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातों में न गड़े व्यवहार में भी अपनाएं।  

अपनी परंपरा और संस्कृति का सम्मान करें, बड़ों का आदर करें और छोटों को प्यार दें। साफ़ मन से सबका स्वागत करें और पास-पड़ोस और रिश्तेदारों से मिल झुलकर रहें। अपनी मान्यता और सोच किसी ओर पर न थोपे, सबके विचारों का सम्मान करें। हर त्योहार को एकता की भावना से पारंपरिक तौर पर मनाएं अपनेपन और भाईचारे के रंग में रंगकर देश को आगे बढ़ाएं, हर कानून हर नियमों का पालन करें और खुद को, घर को, गली मोहल्ले और देश को स्वच्छ रखने में पूरा योगदान दें। पान मसाला गुटका सिगरेट को त्याग दे, न यहाँ-वहाँ थूँके, न कचरा डालें। यातायात को सुचारू रूप से चलाएं और ट्रेफिक नियम तोड़ने पर दण्डित हो तो अपना ज़ुर्म स्वीकार कर लें। हर छोटी बड़ी बात पर गुस्सा होते झगड़ा न मोल लें, न रिश्वत लें और ना हीं दें। अभद्र व्यवहार करते गाली गलोच और निम्न स्तरीय भाषा का प्रयोग न करें माँ, बहन, बेटियों का सम्मान करें और फ़र्ज़ समझते उनकी रक्षा करें। सामाजिक छुट्टियों पर परिवार के साथ घूमने जाएँ या घर पर ही मौज मस्ती से बिताएं।

बाहर से आए लोगों को सहकार देकर अपने देश की संस्कृति की पहचान करवाएं और कहीं बाहर जानें पर हर परिस्थिति में एडजस्टमेंट करते अपने संस्कारों का परिचय दें। क्यूँ बाहर के देशों की तरह अपने देश को स्वच्छ और साफ़ सुथरा नहीं रख सकते। थोड़ा कायदे से चले तो खुद का, परिवार का, मोहल्ले का और देश का विकास हो जाएं। अच्छी बातें अपनाना बुरा तो नहीं, सोच में परिवर्तन लाएंगे तो समाज में अवश्य सुधार दिखेगा। क्या इनमें से एक भी आदत अपनाई है हमनें? कितने बिगड़े हुए है हम तनिक रुकिए, सोचिए बहुत सी गंदगी हमारे भीतर पड़ी है। रोज़ सुबह होती है कोई एक सुबह उठकर ये प्रण लें की आज से मैं इन सारी अच्छाईयों को अपना कर एक आदर्श नागरिक बनूँगा, जैसा पवित्र जीव के रुप में ईश्वर ने मुझे धरती पर भेजा था वैसा ही पाक, साफ़ और निश्चल बनकर खुद को समर्पित करूँगा।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

महिलाएँ: समाज की वास्तविक वास्तुकार

July 18, 2023

महिलाएँ: समाज की वास्तविक वास्तुकार हमारा समाज कहता है, पृथ्वी पर सबसे मूल्यवान वस्तु ‘स्त्रियाँ’ हैं। आइए इस धरती पर

दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

July 18, 2023

 दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ

भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ?

July 18, 2023

भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ? राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक

संयुक्त राष्ट्र वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) अपडेट 2023 जारी

July 13, 2023

संयुक्त राष्ट्र वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) अपडेट 2023 जारी – भारत की बल्ले-बल्ले UN multidimensional poverty report 2023 संयुक्त

दुनियां की नजरें भारत पर – चंद्रयान-3 की 14 जुलाई 2023 को लांचिंग

July 12, 2023

दुनियां की नजरें भारत पर – चंद्रयान-3 की 14 जुलाई 2023 को लांचिंग भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेज़ी से

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति

July 12, 2023

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति यदि मैं आज किसी के पसंद अनुसार चलती, या सरल भाषा मे अगर ये

PreviousNext

Leave a Comment