Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

क्यूँ बेटियों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं

“क्यूँ बेटियों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं” इंसान की मानसिकता कब बदलेगी? बेटियाँ जिगर का टुकड़ा …


“क्यूँ बेटियों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं”

क्यूँ बेटियों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं

इंसान की मानसिकता कब बदलेगी? बेटियाँ जिगर का टुकड़ा होती है, कोई भेड़ बकरी नहीं। बेटी के जज़्बातों को परिवार वाले ही नहीं समझेंगे तो कहाँ जाएगी। लड़की होना कोई गुनाह तो नहीं, क्यूँ लड़कियों को एक दायरे में बाँधने की कोशिश की जाती है? क्यूँ लड़कियों को अपना पसंदीदा जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं दिया जाता।
आज कहीं पढ़ा, एक विधवा ने अपने प्रेमी के साथ भागकर शादी की तो परिवार वालों ने दोनों को इतना मारा की मुश्किल से जान बची दोनों की। क्या गलत किया लड़की ने अगर अपनी दुनिया दोबारा बसाना चाहा? विधवा हो गई तो क्या उसे ज़िंदगी जीने का कोई अधिकार नहीं? उसका दिल दिल नहीं रहता, मन मन नहीं रहता? एहसास एहसास नहीं रहते? क्यूँ विधवाओं से उससे जीने का हक छीन लिया जाता है? क्यूँ परिवार वाले आगे चलकर बेटी की ज़िंदगी में खुशियाँ नहीं लाते। क्यूँ दोबारा शादी नहीं करवाते।

 
समाज अपनी सुविधानुसार नारी को कभी दुर्गा और रणचंडी के रूप में चित्रित करता है तो कभी उसे अबला तथा कोमलांगी बताकर उसकी सुरक्षा के लिए चिंतित होने का अभिनय करने लगता है। घर की माताओं-बहनों और बहू बेटियों की रक्षा का स्वघोषित उत्तरदायित्व पुरुष स्वयं पर ले लेता है, किंतु यह सुरक्षा नारी को तभी तक उपलब्ध होती है जब तक वह पुरुष द्वारा खींची गई लक्ष्मण रेखाओं के भीतर रहती है। इन लक्ष्मण रेखाओं से बाहर निकल कर स्वतंत्रता की तलाश करने की नारी की कोशिश उच्छृंखलता मानी जाती है और इसके लिए उसे दंडित किया जाता है। यह सुरक्षा के बहाने नारी पर वर्चस्व स्थापित करने की चेष्टा है।
कभी-कभी परंपराएँ कुछ एक ज़िंदगियों को जीते जी मार देती है। हर इंसान के सीने में ये जो धक-धक करते धड़कता मशीन है वो मोह माया की नगरी है। प्यार, इश्क, मोहब्बत, एहसास, दु:ख-दर्द इन सारे पुर्जों से बने हृदय से उठते स्पंदन को वश में रखना किसीके बस की बात नहीं। शायद ही कोई एैसा हो जिसे एक से ज़्यादा बार प्यार न हुआ हो। क्या कोई गुनाह है एक उम्र के ढ़लते किसीसे मोह पैदा होना? क्या ड़ाल देने चाहिये एहसासो को इश्क की जलती धूनी में, या एक ड़र के भँवर में डूबोकर मार देना चाहिए?
 
क्या उम्र के चलते या विधवा या विधूर होने के बाद दिल दिल नहीं रहता,
 
एहसास उभरने बंद हो जाते है? सोचो एक लक्ष्मण रेखा के दायरे में सिमटे कितने एहसास खुदकुशी करते होंगे सामाजिक बंदीशों के आगे दम तोड़ते।
“इस समाज की रीत है” जो लाँघते है दायरा वो छीनाल करार दिये जाते है। मार दिए जाते है।
 
मोह तो मोह है कभी भी पैदा हो सकता है। हर इंसान का मन आसक्ति में रममाण होता है।अब आसक्त मन को जबरदस्ती खिंच लाना ढ़ोंग ही हुआ विरक्ति का।
पर हाँ नहीं लाँघ सकते ना सामाजिक व्यवस्था का दायरा, एहसासो को इतनी छूट कहाँ की मोह के पीछे चल दे।
कोई विधवा या विधुर भी इस मोह का शिकार हो सकते है। पर समाज की सीमा से परे जाने की हिम्मत कहाँ।
घोंटना पड़ता है गला चेहरे पर विरक्त भाव की हंसी चमकाए मोह को मारकर, दफ़नाकर दिल ही दिल में। भले ही भीतरी एहसास गिरवी पड़े हो जिससे मोह पैदा हुआ हो उसके दिल की अलमारी में। सभ्य समाज की एक रीत जो ठहरी कि ए लड़कियों तुम्हें कोई हक नहीं अपनी मर्ज़ी से ज़िंदगी जीने का। सामाजिक दायरे में रहो वरना सज़ा की हकदार बनों।
जब भी कोई स्त्री अपने जीवन का सबसे अहम फैसला, जीवन साथी चुनने का निर्णय, अपनी पसंद के अनुसार लेती है तो वह समाज को स्वीकार्य नहीं होता। स्त्रियां तभी तक पूजनीय होती हैं, जब तक वे पितृसत्ता द्वारा अपने लिए निर्धारित कर्तव्यों का पालन करती है और पुरुष प्रधान समाज द्वारा निर्धारित कसौटियों पर खरी उतरती है। जैसे ही वे अपनी अस्मिता की तलाश करने लगती है और अपने मौलिक तथा अद्वितीय होने का प्रमाण देने लगती हैं, उन्हें अनुशासित, दंडित और प्रताड़ित करना शुरू हो जाता है। यह पितृसत्ता की युगों से चली आ रही परंपरा है।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

Saari the great by Jay shree birmi

September 25, 2021

 साड़ी द ग्रेट  कुछ दिनों से सोशल मीडिया में एक वीडियो खूब वायरल हो रहा हैं।दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में

Dard a twacha by Jayshree birmi

September 24, 2021

 दर्द–ए–त्वचा जैसे सभी के कद अलग अलग होते हैं,कोई लंबा तो कोई छोटा,कोई पतला तो कोई मोटा वैसे भी त्वचा

Sagarbha stree ke aahar Bihar by Jay shree birmi

September 23, 2021

 सगर्भा स्त्री के आहार विहार दुनियां के सभी देशों में गर्भवती महिलाओं का विशेष ख्याल रखा जाता हैं। जाहेर वाहनों

Mahilaon ke liye surakshit va anukul mahole

September 22, 2021

 महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करना ज़रूरी –  भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक

Bhav rishto ke by Jay shree birmi

September 22, 2021

 बहाव रिश्तों का रिश्ते नाजुक बड़े ही होते हैं किंतु कोमल नहीं होते।कभी कभी रिश्ते दर्द बन के रह जाते

Insan ke prakar by Jay shree birmi

September 22, 2021

 इंसान के प्रकार हर इंसान की लक्षणिकता अलग अलग होती हैं।कुछ आदतों के हिसाब से देखा जाएं तो कुछ लोग

Leave a Comment