Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Priyanka_saurabh

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है?

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है? हमारे …


क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है?

हमारे देश में भ्रष्टाचार आज से नहीं बल्कि कई सदियों से चला आ रहा है और यह दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जिसके कारण हमारे देश की हालत खराब होती जा रही है। एक पद विशेष पर बैठे हुए व्यक्ति का अपने पद का दुरुपयोग करना ही भ्रष्टाचार कहलाता है। ऐसे लोग अपने पद का फायदा उठाकर कालाबाजारी, गबन, रिश्वतखोरी इत्यादि कार्यों में लिप्त रहते है, जिसके कारण हमारे देश का प्रत्येक वर्ग भ्रष्टाचार से प्रभावित होता है। इसके कारण हमारे देश की आर्थिक प्रगति को भी नुकसान पहुंचता है। भ्रष्टाचार दीमक की तरह है जो कि धीरे-धीरे हमारे देश को खोखला करता जा रहा है।

-प्रियंका सौरभ

एक मजबूत और समृद्ध भारत की महात्मा की दृष्टि – पूर्ण स्वराज – कभी भी एक वास्तविकता नहीं बन सकती है यदि हम सामान्य रूप से हमारी राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज पर भ्रष्टाचार की पकड़ के मुद्दे को संबोधित नहीं करते हैं। समृद्धि और समता की हमारी तलाश में शासन निस्संदेह एक कमजोर कड़ी है। भ्रष्टाचार का उन्मूलन न केवल एक नैतिक अनिवार्यता है बल्कि एक राष्ट्र के लिए एक आर्थिक आवश्यकता है जो बाकी दुनिया के साथ पकड़ने की आकांक्षा रखता है।

तंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की दोहरी चुनौतियों के खिलाफ तीखा हमला किया और कहा कि यदि समय पर इसका समाधान नहीं किया गया, तो ये बड़ी चुनौती बन सकती हैं। भ्रष्टाचार क्या है? सत्ता के पदों पर बैठे लोगों द्वारा किया गया असन्निष्ठ व्यवहार भ्रष्टाचार है। इसमें लोग अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं तथा वे व्यक्ति या व्यवसाय या सरकारों जैसे संगठनों से संबंधित हो सकते हैं। भ्रष्टाचार में कई तरह की कार्रवाइयाँ, जैसे- रिश्वत देना या उसे स्वीकार करना या अनुचित उपहार देना, दोहरा व्यवहार करना और निवेशकों को धोखा देना आदि शामिल शामिल है।भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2021 में भारत 180 देशों में से 85वें स्थान पर था।

हालाँकि, भारत का विरोधाभास यह है कि सतर्क प्रेस और जनमत के बावजूद, भ्रष्टाचार का स्तर असाधारण रूप से उच्च है। इसका श्रेय रिश्वत लेने वालों में अत्यधिक असंवेदनशीलता, शर्म की कमी और सार्वजनिक नैतिकता की भावना के अभाव को दिया जा सकता है। दुर्भाग्य से भारत के लिए, सार्वजनिक जीवन से अनुशासन तेजी से गायब हो रहा है और अनुशासन के बिना, जैसा कि स्कैंडिनेवियाई अर्थशास्त्री-समाजशास्त्री, गुन्नार मिर्डल ने बताया है, कोई वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। अनुशासन का तात्पर्य अन्य बातों के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी नैतिकता और ईमानदारी की भावना से है।

जबकि पश्चिम में एक व्यक्ति जो उच्च अधिकारियों के पदों पर आसीन होता है, कानूनों के प्रति अधिक सम्मान विकसित करता है, हमारे देश में इसके विपरीत सच है। यहाँ, उच्च पद पर आसीन व्यक्ति की पहचान वह आसानी से होती है जिससे वह कानूनों और विनियमों की उपेक्षा कर सकता है। हम अनुशासनहीनता और असत्य की संस्कृति से प्रभावित हो रहे हैं; नैतिकता, सार्वजनिक और निजी दोनों, एक प्रीमियम पर है।

एक परेशान करने वाला पहलू यह था कि भ्रष्टाचार के प्रति समाज का नजरिया भी बदल रहा था। कुछ दशक पहले एक भ्रष्ट और अनैतिक व्यक्ति को पद से हटा दिया गया था। लेकिन अब उनकी मौजूदगी न सिर्फ बर्दाश्त की जाती थी, बल्कि सामान्य मानी जाती थी। भ्रष्ट लोग जब अब जेल जाते हैं तो उनके अनुयायी घोर शोक का प्रदर्शन करते हैं और जब वे जेल से बाहर आते हैं तो जश्न मनाया जाता है और मिठाइयां बांटी जाती हैं।

भ्रष्टाचार का गरीबों और सबसे कमजोर लोगों पर असंगत प्रभाव पड़ता है, लागत बढ़ती है और स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय सहित सेवाओं तक पहुंच कम होती है। भ्रष्टाचार सरकार में विश्वास को खत्म करता है और सामाजिक अनुबंध को कमजोर करता है। यह दुनिया भर में चिंता का कारण है, लेकिन विशेष रूप से भंगुरता और हिंसा के संदर्भ में, क्योंकि भ्रष्टाचार ईंधन और असमानताओं और असंतोष को कायम रखता है जो नाजुकता, हिंसक अतिवाद और संघर्ष का कारण बनता है। इसलिए यह जरूरी है कि “आत्मनिर्भर भारत” के लिए भ्रष्टाचार के सभी रूपों को जड़ से खत्म किया जाए।

हमारे देश में भ्रष्टाचार आज से नहीं बल्कि कई सदियों से चला आ रहा है और यह दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जिसके कारण हमारे देश की हालत खराब होती जा रही है। एक पद विशेष पर बैठे हुए व्यक्ति का अपने पद का दुरुपयोग करना ही भ्रष्टाचार कहलाता है। ऐसे लोग अपने पद का फायदा उठाकर कालाबाजारी, गबन, रिश्वतखोरी इत्यादि कार्यों में लिप्त रहते है, जिसके कारण हमारे देश का प्रत्येक वर्ग भ्रष्टाचार से प्रभावित होता है। इसके कारण हमारे देश की आर्थिक प्रगति को भी नुकसान पहुँचता है। भ्रष्टाचार दीमक की तरह है जो कि धीरे-धीरे हमारे देश को खोखला करता जा रहा है।

आज हमारे देश में प्रत्येक सरकारी कार्यालय, गैर-सरकारी कार्यालय और राजनीति में भ्रष्टाचार कूट-कूट कर भरा हुआ है जिसके कारण आम आदमी बहुत परेशान है। इसके खिलाफ हमें जल्द ही आवाज उठाकर इसे कम करना होगा नहीं तो हमारा पूरा राष्ट्र भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा।

About author 

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh



Related Posts

(राष्ट्रीय बालिका दिवस – 25 सितंबर)

September 24, 2022

(राष्ट्रीय बालिका दिवस – 25 सितंबर)लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है। हमेशा देश में 10वीं और

अलविदा सत्य प्रकाश उर्फ राजू श्रीवास्तव

September 23, 2022

अलविदा कॉमेडी के नूर मनोरंजन भरपूर – हंसी चिकित्सा के धनी को सैल्यूट हंसी हमारे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य

अवैध लोन ऐप की भरमार, बना रही धोखे से कर्जदार

September 22, 2022

अवैध लोन ऐप की भरमार, बना रही धोखे से कर्जदार अनधिकृत डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन की बढ़ती संख्या

मी – टाइम (Me-time) by kishan bhavnani

September 21, 2022

मी – टाइम मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा और तनाव मुक्त जीवन के लिए खुद के साथ समय बिताना बेहद फायदेमंद

बच्चों को भेड़ चाल का हिस्सा मत बनाइए

September 21, 2022

“बच्चों को भेड़ चाल का हिस्सा मत बनाइए” आज के दौर में अभिभावकों के अंदर अपने टहनी से नाजुक बच्चों

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर 2022 पर विशेष

September 21, 2022

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर 2022 पर विशेष पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।  सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ आओ

Leave a Comment