Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh, Politics

क्या क्या बचा पाए/Kya kya bacha paye?

Kya kya bacha paye? क्या क्या बचा पाए? दो मुश्किल ग्रह सचिन के लिए कांग्रेस ने गहलोत जी और अगर …


Kya kya bacha paye? क्या क्या बचा पाए?

दो मुश्किल ग्रह सचिन के लिए कांग्रेस ने गहलोत जी और अगर बीजेपी में आए तो वसुंधरा राजे जी।
सचिन का विद्रोह कोई नहीं बात नहीं हैं।राजस्थान में जीत का सेहरा कांग्रेस को पहनाने वाले सचिन को मुख्यमंत्री तो नहीं बनाया गया लेकिन उप मुख्यमंत्री बनाया गया और वह भी कोई अहमियत बगैर के।उन्हे कोई भी बात में विश्वास में नहीं लिया जाता था और पूर्णतया अनदेखा किया जाता था। जैसे उनकी कोई हैसियत ही नहीं रहने दी जाती थी।तब उन्हों ने विद्रोह कर बीजेपी में सम्मिलित होने के संकेत दिए थे लेकिन वह निष्फल रहे क्योंकि बीजेपी में भी उनको मुख्यमंत्री पद मिलना मुश्किल था क्योंकि यहां वसुंधरा राजे उम्मीदवार थी,सचिन को ये पद मिलना मुश्किल था तो उन्हे पूरे नाट्यात्मक विद्रोह के अंत में वापस कांग्रेस में ही जाना पड़ा था।
अब ताजा खबरें तो ये हैं कि गहलोत के कांग्रेस के पार्टी प्रमुख की होड़ में शामिल होने जा रहे थे तो मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़े लेकिन उनकी मंशा दोनों पदों पर बने रहने की थी जो पार्टी के नियमों के विरुद्ध की बात हैं।
अब पार्टी प्रमुख के चुनाव तो एक तरफ रह गया और राजस्थान में यादवस्थली शुरू हो गई हैं।
अब जब गहलोतजी ने आला कमांड की सूचना मानने से इंकार कर दिया जो उनकी आला कमांड से हो रही दूरी को बयां करता हैं।कहां एक जमाने में ( वैसे तो दो दिन पहले)गांधी फैमिली के बहुत नजदीक होने की बातें होती थी वह सिर्फ दो ही दिनों में बदल गई।
आज उन्हों ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने देने के लिए सारे हथकंडे अपना लिए। और अपने समर्थकों की मदद से सचिन को दगाखोर को मुख्यमंत्री नहीं बनने दे रहे हैं।अजय माकन और मल्लिका अर्जुन खड़गे के प्रति भी उनके विचार कुछ अलग ही हैं,ये दोनों हाई कमान के आदेश पर राजस्थान जा कर राजस्थान कांग्रेस की मीटिंग बुला कर हाई कमान का संदेश दे उनकी रिपोर्ट दिल्ली पहुंचने की उनकी जिम्मेवारी थी,लेकिन दोनों ही नाकामयाब रहे।
अब थोड़ी सचिन और गहलोत की तुलना करे तो कुछ बातें समझ में आयेगी कि क्या और क्यों हो रहा है ये सब राजस्थान में? अब वही झगड़ा दिल्ली तक पहुंच चुका हैं,खुल्ले आम दिल्ली v राजस्थान का राजकीय मैच शुरू हो चुका हैं।धारीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के दोनों नेता खाली हाथ ही दिल्ली पहुंचे हैं।दिल्ली से संदेश आया था कि मुख्यमंत्री पद के लिए जो निश्चय वही करेंगे और सब विधायकों को ये प्रशस्ति पत्र लिख भेजना था जो गहलोत के हुकम से नहीं भेजा गया।अब सचिन भी दिल्ली पहुंचे हैं लेकिन उनकी दिल्ली यात्रा के बारे में कोई भी डिटेल किसी को भी पता नहीं।
गहलोत की शर्तें,वैसे एक ही दिन में क्यों चाहिए उन्हे मुख्यमंत्री,क्यों पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के बाद क्यों नहीं हुआ? 19 अक्टूबर के बाद भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांगा जा सकता था।सचिन या उसके समर्थकों में से कोई भी मुख्यमंत्री नहीं बनाने की भी शर्त रखी थी।
अब भी एक मूक मोहन की तलाश हैं गांधी परिवार को पार्टी अध्यक्ष के रूप में।कोई भी राज्य में अपना स्थान मजबूत बना चुके हैं वे पार्टी अध्यक्ष बन कर कठपुली बनना पसंद नहीं करेंगे।अगर 23 में होने वालें चुनावों में हार हुई तो ठीकरा फोड़ने केलिए अध्यक्ष और जीते तो यश खुद ही के लेंगे।आज गहलोत ऐसी जगह जा बैठे हैं जहां उनका कॉन्टैक्ट नहीं किया जा सके।
अब शिस्त भंग करने के लिए अगर किसी को सजा दी जाएं तो वह हैं गहलोत जी लेकिन सजा उन्हे नहीं दे कर कार्यवाही होगी तो इन तीन लोगों पर जिन्होंने धारासभ्यो की बैठक छोड़ समांतर बैठक बुलाई थी,जो गहलोत जी के वफादार भी हैं,केबिनेट मंत्री शांति धारीवाल,विधानसभा चीफ व्हिप महेश जोशी और धारासभ्य धर्मेंद्र राठौड़ हैं।क्योंकि अगर राजस्थान में सरकार बचानी हैं तो मुख्यमंत्री को क्लीन चिट देना आवश्यक बन जाता हैं।
अब तो गहलोत जी को दिल्ली से भी बुलावा आ गया हैं तो क्या राजस्थान को नहीं छोड़ने की इच्छा रखने वाली उनकी इच्छा पूरी हो जायेगी क्या?कांग्रेस के पार्टी प्रमुख के लिए भी नामांकन पत्र भरकर उम्मीदवारी लिखा सकते हैं या सिर्फ मुख्य मंत्री बने रहेंगे ये तो भविष्य ही बताएगा।

जयश्री बिरमि
( संकलित)

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान

July 24, 2025

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान एक ऐसी दुनिया में जहां शारीरिक रूप अक्सर केंद्र बिंदु होता

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

July 7, 2025

“चाह गई चिंता मिटी मनुआ बेपरवाह जाको कछु ना चाहिए वो शाहन के शाह” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय द्वारिका

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

June 10, 2025

साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

May 26, 2024

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी अगर आप विजेता बनना चाहते हैं, तो विजेताओं के साथ रहें। अगर आप

विचारों की भी होती है मौत

विचारों की भी होती है मौत

May 26, 2024

प्रत्येक दिन दिमाग में 6,000 विचार आते हैं, इनमें 80% नकारात्मक होते हैं। इन नकारात्मक विचारों से दूर रहने के

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

May 26, 2024

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह तीरंदाज एक बार में एक ही लक्ष्य पर निशाना साधता है। गोली चलाने वाला एक

Leave a Comment