Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

कौन है अच्छा इंसान?

 कौन है अच्छा इंसान? जितेन्द्र ‘कबीर’ एक अच्छा इंसान नहीं टालता किसी का कहना, मान लेता है सबकी बात बिना …


 कौन है अच्छा इंसान?

जितेन्द्र 'कबीर'
जितेन्द्र ‘कबीर’

एक अच्छा इंसान

नहीं टालता किसी का कहना,

मान लेता है सबकी बात

बिना कोई बहस अथवा विरोध किए,

कर देता है खुशी से

वे सारे काम

जो उसे बताए जाते हैं घरवालों,

पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों

के द्वारा,

रुपए-पैसे अथवा अन्य किसी 

सहायता के लिए भी

करता नहीं वह किसी को इंकार,

एक अच्छा इंसान

बुरा लगने लगता है जब वह

बोलने लगता सच को सच

और झूठ को झूठ

किए बिना किसी की लिहाज,

सबका हुक्म 

बजाते जाने की अपेक्षा जब वह

रखने लगता है 

सिर्फ अपने काम से काम,

नहीं बढ़ा पाता जब वह 

अपनी आर्थिक तंगी अथवा अन्य किसी

समस्या के चलते

किसी की ओर मदद का हाथ।

इंसान के लिए

बहुत मुश्किल है कि वह बना रहे

अपनी पूरी उम्र सबके लिए

एक अच्छा इंसान,

गलतफहमियों अथवा 

परिस्थितियों के चलते कोई न कोई

मान ही बैठता है उसे बुरा इंसान।

                             जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

swapn kavita by Arun kumar shukla

July 18, 2021

शीर्षक-स्वप्न लोग कहते जिंदगी का है सफर छोटा,जानकर के भी मगर मैं भूल जाता हूं।जिस समय मैं सोचता बेचैन रहता

Rishta apna by Dr hare Krishna Mishra

July 18, 2021

 रिश्ता अपना अर्धांगिनी उत्तराधिकारिनी , मेरे जीवन की कामिनी , बहती आई अंतस्थल में , पावन निर्मल गंगा जैसी  ।।

gazal by rinki singh sahiba

July 18, 2021

ग़ज़ल  सौ बार उससे लड़ के भी हर बार हारना, बाज़ी हो इश्क़ की तो मेरे यार हारना। उससे शिकस्त

Acche insan ki pahchan by Jitendra kabir

July 17, 2021

 अच्छे इंसान की पहचान खुद के लिए हो अच्छा सबसे पहले एक इंसान, हो सके जहां तक रखे अपने शरीर

Najar najar ka antar by Jitendra kabir

July 17, 2021

 नजर नजर का अंतर भ्रष्टाचार जो हमारी नजर में है, उससे पैसा बनाने वालों की नजरों में रोजगार है। मंहगाई

Duniya dikhawa pasand hai by Jitendra kabir

July 16, 2021

 दुनिया दिखावा पसंद है कितना भी बड़ा और दयालू  मन हो तुम्हारा, चाहे गुमनाम रहकर कर लो  तुम जरूरतमंदों का

Leave a Comment