Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कोई हल तो होगा- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

कोई हल तो होगा भुखमरी मिटाने के लाख दावों के बावजूदनाकाम रही हैं सरकारें अब तकसब लोगों तक दो जून …


कोई हल तो होगा

कोई हल तो होगा- जितेन्द्र ' कबीर '

भुखमरी मिटाने के लाख दावों के बावजूद
नाकाम रही हैं सरकारें अब तक
सब लोगों तक दो जून रोटी पहुंचाने में,
मुझे विश्वास है…
किसी भूख से पीड़ित के पास इस समस्या का
कोई कारगर हल जरूर होगा।

गंदगी हटाने के लाख दावों के बावजूद
नाकाम रही हैं सरकारें अब तक
साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था बनाने में,
मुझे विश्वास है…
किसी सफाई कर्मी के पास इस समस्या का
कोई कारगर हल जरूर होगा।

भ्रष्टाचार मिटाने के लाख दावों के बावजूद
नाकाम रही हैं सरकारें अब तक
ईमानदार व पारदर्शी कोई व्यवस्था बनाने में,
मुझे विश्वास है…
भ्रष्टाचार के किसी भुक्तभोगी के पास इसका
कोई कारगर हल जरूर होगा।

न्याय दिलाने के लाख दावों के बावजूद
नाकाम रही हैं सरकारें अब तक
अन्याय को उसके सही अंजाम तक पहुंचाने में,
मुझे विश्वास है…
अन्याय से त्रस्त किसी इंसान के पास इसका
कोई कारगर हल जरूर होगा।

जितेन्द्र ‘ कबीर ‘
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश 176314
संपर्क सूत्र 7018558314


Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment