Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

कोई रंग ऐसा बरस जाए- जितेन्द्र ‘कबीर’

कोई रंग ऐसा बरस जाए इस बार होली में कोई रंग आसमां सेऐसा बरस जाए,कि बस इंसानियत के रंग में …


कोई रंग ऐसा बरस जाए

कोई रंग ऐसा बरस जाए- जितेन्द्र 'कबीर'

इस बार होली में कोई रंग आसमां से
ऐसा बरस जाए,
कि बस इंसानियत के रंग में रंगी
सारी दुनिया नजर आए।
चमड़ी का रंग दिखे सबका एक ही
उसमें नस्ल नजर ना आए,
वैर-विरोध का कारण जो बनें
ऐसी फसल नजर ना आए।
पाखंड के ओढ़े हैं नकाब जिस-जिसने
सबके सब उतर जाएं,
बस एक दिन के लिए ही सही लेकिन
सबके असली चेहरे नजर आएं।
कड़वाहट घोलने वाली कोई भी बात
कान के अंदर ना जाए,
गुझिया की मीठी-मीठी सी महक
हर एक शब्द में घुलती जाए।
दिलो-दिमाग में पनपने वाले बुरे विचार
होलिका के साथ भस्म हो जाएं,
शांति और भाईचारे का दुनिया में
इस बार रंगीन एक जश्न हो जाए।

जितेन्द्र ‘कबीर
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन -मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”

January 25, 2022

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन । ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।तुझको मेरा नमन , तुझको मेरा नमन ।। आबरू तेरी जाने नां देंगें कभी ।

दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

January 24, 2022

भज़नदे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार बस इतनी

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…

January 24, 2022

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…. नन्हीं कड़ी में…. आज की बात जीना चाहता हूँ… (कविता…) मैं भी किसी के आँख का तारा

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा

January 24, 2022

हिंदू राष्ट्र मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं। अगर तुम देने को तैयार हो समानताकिसी को नहीं बता रहे हो

आगे बढ़ते हैं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

आगे बढ़ते हैं! वक्त बीत गया, समा बदल गया, चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं,दिल में लाए दया,अब और

यही कुछ फर्क है!- डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

यही कुछ फर्क है! जब नहीं था हमारे पास अलार्म, स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन

Leave a Comment