Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कोई कुछ साथ न ले जा पाया- जितेन्द्र ‘कबीर’

कोई कुछ साथ न ले जा पाया रिश्वतें देकर रुपयों-पैसों,कीमती धातुओं, हीरे-जवाहरात की,दिन-रात स्तुति गान में रमे रहकर,सौदे बहुत किये …


कोई कुछ साथ न ले जा पाया

कोई कुछ साथ न ले जा पाया- जितेन्द्र 'कबीर'

रिश्वतें देकर रुपयों-पैसों,
कीमती धातुओं, हीरे-जवाहरात की,
दिन-रात स्तुति गान में रमे रहकर,
सौदे बहुत किये लोगों ने
ईश्वर के साथ,
अफसोस!
कोई भी सौदा अनंतकाल तक
टिक ना पाया।

अपने लौकिक एवं पारलौकिक
स्वार्थ के लिए उन्होंने
पता नहीं कितने निर्दोषों का दिल दुखाया,
अपने ईश्वर को प्रसन्न करने के नाम पर
पता नहीं कितने निर्दोषों का खून बहाया,
बड़े-बड़े साम्राज्यों एवं जागीरों का बना स्वामी,
अफसोस!
जाते समय अपने साथ कोई भी वस्तु
चाहकर भी न ले जा पाया।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता -जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

मेरी शब्दों की वैणी

September 4, 2022

मेरी शब्दों की वैणी यादों के भंवर में डूब कर मैं अकसर मोतियन से शब्द लातीबगिया शब्दों कि मेरी जहां

गुरुवर जलते दीप से(शिक्षक दिवस विशेष)

September 4, 2022

गुरुवर जलते दीप से दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब

आई पिया की याद..!!

September 1, 2022

आई पिया की याद..!! मन मयूर तन तरुण हुआबरखा नें छेड़े राग।गरज गरज घन बरस रहेआई पिया की याद।। छानी

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन

September 1, 2022

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन नन्हीं सी पीठ पर बस्ते का बोझ हैदब रहा है बचपन लूट

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले

September 1, 2022

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकालेजो टूट मैं गया तो

कविता – मोहन

September 1, 2022

कविता – मोहन मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारीअगाध अनन्त हुई कैसेप्रीत में पागल मीराबाईमन से सन्त हुई कैसे राधा ने

PreviousNext

Leave a Comment