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kishan bhavnani, poem

कुछ ऐसे अफ़सर होते हैं

व्यंग्य-कविता कुछ ऐसे अफ़सर होते हैं कुछ ऐसे अफ़सर होते हैं जो ज्ञान के खोते होते हैं ऑफिस में सोते …


व्यंग्य-कविता

कुछ ऐसे अफ़सर होते हैं

कुछ ऐसे अफ़सर होते हैं
जो ज्ञान के खोते होते हैं
ऑफिस में सोते हैं
अज्ञान में खुद को दुबेते हैं

कुछ रेड पथक में शामिल होते हैं
जानकारी के अज्ञात मालूम होते हैं
कानून की जानकारी में अज्ञात होते हैं
तोते की तरह प्रक्रिया करते हैं

कुछ दस्ते मनीराम के चहेते होते हैं
उसके बल पर कुछ को छोड़ते पकड़ते हैं
प्रक्रिया में अज्ञात होते हैं
ऐसे अफ़सरों के घर नोटों के पहाड़ होते हैं

कुछ अफ़सर स्काट का अतिरिक्त प्रभार
मिलने पर धन बटोरने में लगे होते हैं
अपने मूल विभाग का ध्यान खोते हैं
मलाई पर लक्ष्य भेदकर बहुत खुश होते हैं

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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