Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’

किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के …


किस मुगालते में हो?

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र 'कबीर'
एक बात सच – सच बताओ..
अभी तक नहीं हुए हो क्या तुम
व्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगत
किसी बेइंसाफी के शिकार?
किसी वहशी जानवर ने की नहीं
तुम्हारे परिवार की बहन-बेटी की
इज्जत तार – तार?

जाति और धर्म के नाम पर
भड़काए गये दंगों में जला नहीं है
अभी तक तुम्हारा घर-बार?
चालाकी अथवा षड़यंत्र करके
छीना नहीं गया है अभी तक
तुम्हारा भरण पोषण करने वाली
भूमि पर से पुश्तैनी अधिकार?
तबाह नहीं हुआ व्यवस्थागत
गलतियों से
अभी तक तुम्हारा काम-धंधा
और रोजगार?

इलाज को तरसते गुजर गये
अपने किसी परिजन के शव का
उठाया नहीं है अभी तक भार?
पेट की भूख मिटाने के लिए
सहा नहीं है जमाने भर की लांछन
और तिरस्कार?

तभी तो बिना तुम्हारा खून खौलाए
निकल जाते हैं रोज
हजारों ऐसे जुल्म के समाचार,
आंखों के सामने अन्याय होता
देखकर भी सीने में उठती नहीं कभी
उसको रोकने की हुंकार,
तभी तो ऐसे हालात को बदलने के लिए
एकबारगी उठ खड़े होने के बजाय

कायर बन असली मुद्दों से
नजर चुराकर चढ़ा लेते हो अपने दिमाग पर
आने वाली किसी नई फिल्म का खुमार,
या फिर मूर्ख बनकर मान बैठे हो सच
सदियों पुराना स्वर्ग-नरक और
कर्म-फल का इश्तिहार,
अपने साथ हुए हर गलत काम को
अपना नसीब मान
चुपचाप सिर झुकाकर कर लें

अपनी नियति को स्वीकार,
मुगालता यह भी हो सकता है तुम्हें
कि जुल्म को सहते जाओ अनंतकाल तक
इस उम्मीद में
कि एक दिन भगवान खुद आकर करेंगे
दुष्टों और अत्याचारियों का संहार,
जुल्म को सहते हुए अपनी कायरता को
छिपाने के हों चाहे
तुम्हारे पास जितने भी शाब्दिक हथियार,
इंसानियत की नजर में हो तुम
इस धरती पर एक अवांछनीय भार।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

मतदाता जागरूकता पर कविता

March 25, 2022

मतदाता जागरूकता पर कविता| matdata jagarukta par kavita हे मतदाता हे राष्ट्रनिर्माता  हे मतदाता !, हे राष्ट्रनिर्माता ! दारू मुर्गे

सुहानी शाम- डॉ इंदु कुमारी

March 25, 2022

सुहानी शाम जिंदगी में सुरमईशाम आ जाएउदासी की समंदर मेंएक उफान आ जाएदुख भरी दिनों में भीसुर्ख होठों परमुस्कान आ

शहीद आज भी ज़िंदा हैं-मईनुदीन कोहरी ” नाचीज़

March 25, 2022

सरदार भगतसिंह के शहीदी दिवस पर विशेष शहीद आज भी ज़िंदा हैं वतन की राह में कुर्बान होने वाले ।

सफर- मईनुदीन कोहरी “नाचीज बीकानेरी”

March 25, 2022

सफर “जिंदगी का सफर”पेड़ की छाया जिस तरह इधर से उधर जाती है ।आदमी की जिंदगी भी सुख-दुख में कट

कदम-मईनुदीन कोहरी “नाचीज बीकानेरी

March 25, 2022

कदम कदम बढाओ खुशियाँ लाओबढाओ कदमनाम कमाओ ।मजदूर का कदममेहनत का कदमपसीने की कमाईकमाओ हर कदम ।।नेताओं के कदमगर सम्भले

बटवारो-नाचीज़ बीकानेरी

March 25, 2022

बटवारो आंख्याडब-डब भरसुबक – सुबकरोवती मां,म्हनैं कांई ठाअ’ दिन भी देखणा पड़सी । घणा दौरा पाळयाछाबड़ै में नागड़ाआज मूंडो टोडीयो

Leave a Comment