Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

कितनी विभिन्नता में एकता

कितनी विभिन्नता में एकता कश्मीर से कन्या कुमारी तक विविधता से भरा अपना देश है।सुंदर स्वर्ग सा कश्मीर जहां हूर …


कितनी विभिन्नता में एकता

कितनी विभिन्नता में एकता

कश्मीर से कन्या कुमारी तक विविधता से भरा अपना देश है।सुंदर स्वर्ग सा कश्मीर जहां हूर सी सुंदर स्त्रियां बसती है।जहां प्रकृति सोलह सिंगार कर रहती है उसी कश्मीर में आग के गोले बरसाते है।आज भी भारत में ही भारतीय जानें से डरते है।तो क्या ये एकता हैं? आईने को सजा कर सुंदर दिखा नहीं जाता,सुंदर दिखने के लिए सुंदर तन मन का होना अति आवश्यक है।
दक्षिण भारत में समंदर किनारों का सौंदर्य बिखरा पड़ा है।कुदरत ने चारों हाथों से सौंदर्य बिखरा हैं।वहां की जमीन में फलद्रुप है।जहां की भाषाओं में संस्कृत की झलक दिखती हैं।वहीं पर हिंदी जो राष्ट्र भाषा है उसी का उपयोग अस्वीकृत हैं तब एकता कहां का दर्शन हो रहा हैं।
वैसे भी राजकारियों ने देश को कई हिस्सों में बांट रखा है और उसका अपने राजकीय रोटियों को सेकने के लिए उपयुक्त बना उपयोग करते हैं।
उससे तो पुराना हिंदुस्तान अच्छा था जहां हर जाति और प्रांत के लोग अपनी अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करके जीते थे।सब को अपने अपने स्थान का पता था वही अपनी मर्यादाओं में जीते थे।दूसरों को जीने देते थे।आज देश की वर्ण व्यवस्था जो एक सामाजिक सौहार्द था उसे जातिवाद में तब्दील कर हर जातिबका नेता वर्ग अपना फायदा उठ रहा है और उनकी मदद से राजनेताओं अपनी कुर्सियों की जमीन पुख्ता कर रहें है। न ही उनको विविधता में कोई रस है न ही एकता में उन्हें तो रस है अपनी राजकीय उन्नति में।पहले राजघरानों में राजकरण होता था आज घर घर में राजकरण प्रवेश कर चुका है जो देश हित में बहुत घातक है।

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)


Related Posts

योग @ एक विश्व एक परिवार – अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 june yoga day

June 20, 2023

योग @ एक विश्व एक परिवार – अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2023 पर विशेष आओ योग को अपनी दिनचर्या

गुलजार की ‘किताब’ में पैरेंटिंग का पाठ| Parenting lesson in Gulzar’s ‘kitaab’

June 17, 2023

सुपरहिट:गुलजार की ‘किताब’ में पैरेंटिंग का पाठ 1977 में आई ‘किताब’ फिल्म में एक दृश्य है। फिल्म का ‘हीरो’ बाबला

नई पीढ़ी के लिए विवाह में फ्लेक्सिबल बनना जरूरी है |

June 17, 2023

नई पीढ़ी के लिए विवाह में फ्लेक्सिबल बनना जरूरी है ‘विवाह‘ यह हमेशा से चुनौतीपूर्ण संबंध रहा है। दो परिचित

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

June 17, 2023

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने

June 17, 2023

उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने हां जी हां, सही कह रही हूं। बहुत ही सरल तरीका पहचानने

क्लासिक :कहां से कहां जा सकती है जिंदगी| classic:where can life go from

June 17, 2023

क्लासिक:कहां से कहां जा सकती है जिंदगी जगजीत-चित्रा ऐसे लोग बहुत कम मिलेंगे, जिन्होंने विख्यात गजल गायक जगजीत-चित्रा का नाम

PreviousNext

Leave a Comment