Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

कितना विरोधाभास है?- जितेन्द्र ‘कबीर’

कितना विरोधाभास है? कितना विरोधाभास हैइंसान की फितरत में भी,अपनी हर मुसीबत मेंईश्वर का साथ पाने के लिएप्रार्थना करेगा भी …


कितना विरोधाभास है?

कितना विरोधाभास है?- जितेन्द्र 'कबीर'

कितना विरोधाभास है
इंसान की फितरत में भी,
अपनी हर मुसीबत में
ईश्वर का साथ पाने के लिए
प्रार्थना करेगा भी बहुत
और फिर उसके साथ जाने से
डरेगा भी बहुत।
कितना विरोधाभास है
इंसान की फितरत में भी,
ईश्वर के हाथ में है जीवन-मृत्यु,
दुनिया में इसका प्रवचन
करेगा भी बहुत
और मृत्यु का सामना करने से
टलेगा भी बहुत।
कितना विरोधाभास है
इंसान की फितरत में भी,
अपनी तरक्की के लिए
ईश्वर की पूजा ( खुशामद )
करेगा भी बहुत
और फिर जीवन में अपने
खुशामद की बुराई करेगा भी बहुत।
कितना विरोधाभास है
इंसान की फितरत में भी,
ईश्वर को चढ़ावा ( रिश्वत ) चढ़ाकर
अपनी खुशहाली की मंगल कामना
करेगा भी बहुत
और फिर जीवन में अपने
रिश्वत की बुराई करेगा भी बहुत।
कितना विरोधाभास है
इंसान की फितरत में भी,
अपना परलोक सुधारने को
ईश्वर के नाम पर दान-धर्म
करेगा भी बहुत
और अपने पड़ोसियों से
निज स्वार्थ खातिर लड़ेगा भी बहुत।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश 176314
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment