Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

कामकाजी महिला से रत्ती भर कमतर नहीं गृहिणी | housewife is not an iota less than a working woman.

“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब …


“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब से कोई देखें तो पहचान पाए, मरने का भी वक्त नहीं होता एक गृहिणी के पास”

एक आम और मामूली सा शब्द है ‘गृहिणी‘ यानि की गृह को संभालने वाली परिवार का आधार, बड़े बुज़ुर्गों के बुढ़ापे की लाठी, पति के सुख-दु:ख की साथी और एक अहम काम जिनके हिस्से आया वो है; हर कूल के बीज को अपनी कोख में पालना, जन्म देना और खुद को भूलाकर बच्चों के लिए अपनी सुंदरता, सौ-सौ रातों की नींद और अपने सपने गिरवी रख देना कुल मिलाकर अपना सर्वस्व झोंक देना। ऐसे अनेकों किरदार निभाने वाली स्त्री यानी कि गृहिणी की वैल्यू कितनी? तो बोले कौड़ी की! कोई पूछे कि क्या करती हो? तो इतनी जिम्मेदारियाँ निभाने वाली बोलेगी “कुछ नहीं गृहिणी हूँ।” गृहिणियों के लिए तंज कसे जाते है कि महारानी की तरह रहती है! जबकि उसके विपरीत पसीने से तरबतर समय के साथ दौड़ती ज़िंदगी की आपाधापी से जूझते खुद को ढूँढती रहती है हर गृहिणी।
पर….यही गृहिणी अगर कामकाजी हो पाँच, पच्चीस, पचास हज़ार कमाकर लाती हो तो? कीमत करोड़ों की हो जाती है! ऐसा क्यूँ? क्या पैसे ही सबकुछ होते है? एक औरत की परिवार को सहजने की सालों की जद्दोजहद शून्य होती है? माना कि कमाऊ पत्नी की जिम्मेदारियाँ ज़्यादा होती है, घर के साथ-साथ ऑफ़िस को संभालना आसान नहीं, दोहरी भूमिका निभाना मुश्किल होता है। इसका मतलब ये हरगिज़ नहीं कि जो औरतें नौकरी नहीं करती उसका योगदान परिवार के प्रति कम आंका जाए। पर बेशक कामकाजी औरत के घर की व्यवस्था गृहिणी के घर के मुकाबले डावाँडोल भी होती है। बहुत सारी औरतें घर बैठे भी काम करके चार पैसे कमा कर पति का हाथ बँटाती है।
गृहिणी अगर चार दिन भी बाहर जाती है न, तब घरवालों की सिट्टी-पिट्टी गूल हो जाती है। सुबह से शाम दिनरथ पर दौड़ते दो हाथ और दो पैरों से दस हाथ पैरों का काम लेती है। माँ, बीवी, बहू, भाभी, चाची के नाम की पुकार पर यहाँ से वहाँ भागती हर किसीके नखरे उठाती है। अपने अस्तित्व को परे रखकर सबको राज़ी रखती है।
बाहर से आते ही घर के हर सदस्य की आँखें गृहिणी को ही ढूँढती है! माँ खाना दो, बीवी पानी दो, बहू ज़रा चाय बना दो, भाभी मेरा लेपटाप किधर है। हर कोई एक व्यक्ति पर निर्भर होता है। साथ ही बाहर के हर काम बखूबी निपटाती है। बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती है, सास-ससुर की दवाई का जुगाड़ करती है, एटीएम से पैसे निकालती है, मोल भाव करते बजेट में घर चलाती है, और रिश्तेदारी और व्यवहार निभाते अपनी सक्षमता का परिचय देती है। पति के चेहरे की शिकन से मूड़ जान लेने वाली अपने कँधे का सहारा देकर पूछती है क्या बात है? कोई परेशानी है क्या? पति जब कहता है की हाथ ज़रा तंग है तब यही गृहिणी घर खर्च से बचाए हुए पैसे पति के हाथ पर रखकर तकलीफें कम कर देती है। कोई अपेक्षा नहीं, कोई पगार नहीं मांगती बल्कि अपनी शक्ति खर्च करते देना जानती है। ज़िंदगी की हर चुनौतियों से लड़ने का हुनर जानती है।
पति सुबह से शाम निश्चिंत होकर काम तभी कर सकता है! क्यूँकि उसे भरोसा होता है पत्नी पर, वो जानता है मेरी गैरमौजूदगी में कोई है जो मेरे घर की बखूबी देखभाल करती है। तभी तो स्त्री के लिए कहा गया है कि,
अतुलं तत्र तत्तेजः सर्वदेवशरीरजम्।
एकस्थं तदभून्नारी व्याप्तलोकत्रयं त्विषा॥
अर्थात : सभी देवताओं से उत्पन्न हुआ और तीनों लोकों में व्याप्त वह अतुल्य तेज जब एकत्रित हुआ तब वह नारी बना।
गृहिणियों के योगदान को नज़र अंदाज़ करने वालों गृहिणी ही चार दिवारी को घर बनाती है! जिसे अंग्रेजी में कहते है “होम मैकर” इनकी सुझ-बूझ किसी बिज़नेस मैन से कम नहीं होती, तो कहो गृहिणी हुई न अनमोल? जिसके कँधों पर संसार की नींव थमी है।
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

July 23, 2021

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि

OTT OVER THE TOP Entertainment ka naya platform

July 23, 2021

 ओटीटी (ओवर-द-टॉप):- एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा ऑनलाइन सामग्री प्रदाता है जो स्ट्रीमिंग मीडिया को एक स्टैंडअलोन

Lekh jeena jaruri ya jinda rahna by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 लेखजीना जरूरी या जिंदा रहना        शीर्षक देखकर चौंक गये न आप भी, थोड़ा स्वाभाविक भी है और

Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news

July 21, 2021

 Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news  इस आर्टिकल मे हम जानेंगे विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर से जुड़ी खबरों के

umra aur zindagi ka fark by bhavnani gondiya

July 18, 2021

उम्र और जिंदगी का फर्क – जो अपनों के साथ बीती वो जिंदगी, जो अपनों के बिना बीती वो उम्र

mata pita aur bujurgo ki seva by bhavnani gondiya

July 18, 2021

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं – एड किशन भावनानी गोंदिया  वैश्विक रूप से

Leave a Comment