Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, saraswati_mallick

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक

कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित …


कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक
कान्हा तू काहे करत मनमानी

बार -बार समझाया तुझको
फिर भी एक न मानी
नित नवीन शरारत करिके
मोहे कियो हलकानी
कान्हा तू काहे करत मनमानी ।

अपने घर में भरपूर है माखन
देख औरन की ललचानी
ग्वालों के संग चोरी करत है
ग्वालन हैं खिसियानी
लाला , मत कर तू नादानी
कान्हा तू काहे करत मनमानी !

कान मरोड़ा कान्हा का , 

 क्रोधित हुई नंदरानी
माँ का कहना जो ना माना
तो मार पड़ेगी खानी
पिघल गया फिर माँ का दिल
देख रूप बचकानी
कान्हा तू काहे करत मनमानी ।

माँ की डाँट में भी स्नेह सुधा है ,
कहते हैं सब ज्ञानी ,
इसीलिए तो देवलोक भी रहता
धरा पर आने को अकुलानी,
विष्णु रूप हैं कान्हा ,
है मैया यशोमती अंजानी ।

मौलिक एवं स्वरचित ,
– सरस्वती मल्लिक
मधुबनी , बिहार


Related Posts

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

March 4, 2023

भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने

धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं

March 4, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा

हे परमपिता परमेश्वर

March 4, 2023

भावनानी के भाव हे परमपिता परमेश्वर आपके द्वारा दिए इस जीवन में इन मुस्कुराहटों का हम पर एहसान है हर

हे परवरदिगार मेरे मालिक

March 4, 2023

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं

कविता: भारतीय संस्कृति में नारी | bharatiya sanskriti me naari

February 16, 2023

 भावनानी के भाव कविता:भारतीय संस्कृति में नारी  भारतीय संस्कृति में नारी  लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है समय आने

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

February 16, 2023

 भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment