Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

काट दिए मेरी कलम के पर

 काट दिए मेरी कलम के पर तमन्ना थी कभी खुद को , मैं खूब संवारूंगीसौलह श्रंगार करके , मैं खुद …


 काट दिए मेरी कलम के पर

काट दिए मेरी कलम के पर

तमन्ना थी कभी खुद को , मैं खूब संवारूंगी
सौलह श्रंगार करके , मैं खुद कि ही नज़र उतारूंगी।।

आया वो वक्त जब तमन्नाओं को पूरा हमें करना था
मुझे क्या पता था , तमन्नाओं को मैं सीने में ही दबाऊंगी।।

कहते हैं , तुम्हारा दायरा सिर्फ घर कि ये चार दीवारी है
सोचती हूं , जमाने से क्या अब मैं न कभी मिल पाऊंगी।।

कब तलक खुद कि तमन्नाओं का दम़ मैं घोंटू
कब तलक , शब्दों को सजा मैं खुद को मरहम लगाऊंगी।।

उड़ना चाहती , कलम के पर लगा मैं खुले आसमां में
काट दिये मेरी कलम के पर , क्या मैं अब उड़ ना पाऊंगी

हो रही वीणा की झंकार भी अब कुछ मधम-मधम
वीणा कि झंकार के सुर , लगता है अब मैं खो ही जाऊंगी।।

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

कविता – ख्वाब – सिद्धार्थ गोरखपुरी

May 9, 2022

 कविता – ख्वाब  ये ख्वाब न होते तो क्या होता? झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

PreviousNext

Leave a Comment